
हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने हाल ही में दो आंतरिक रिपोर्टों के प्रकाशन के बाद अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और प्रवेश प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा का वादा किया है। ये रिपोर्टें पिछले वसंत में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के बाद सामने आईं, जिनमें यहूदी-विरोधी और अरब-विरोधी सोच के आरोप लगे थे।
मंगलवार को जारी इन रिपोर्टों के साथ, हार्वर्ड एक अन्य मुद्दे को लेकर ट्रम्प प्रशासन से भी संघर्ष कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि छात्र आंदोलनों से नफरत फैल रही है, और इसी आधार पर उसने विश्वविद्यालय की 2.2 अरब डॉलर की फेडरल फंडिंग रोक दी है। इसके जवाब में हार्वर्ड ने अदालत में मुकदमा दायर किया है, जिस पर उच्च शिक्षा क्षेत्र में गंभीरता से नजर रखी जा रही है।
हार्वर्ड के अंतरिम अध्यक्ष एलन गार्बर ने एक कैंपस संदेश में कहा, “हमने पिछले वर्ष आवश्यक बदलाव किए हैं, लेकिन आगे और ठोस कदम उठाए जाएंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसा स्थान बनाना चाहिए जहां विचारों का आदान-प्रदान खुलेपन और सत्य की खोज की भावना से हो।
आंतरिक पैनल और सिफारिशें
पिछले वर्ष गार्बर ने यहूदी-विरोध और मुस्लिम-विरोधी पूर्वाग्रह की जांच के लिए दो पैनल गठित किए थे। इन पैनलों की अंतिम रिपोर्ट में 500 से अधिक पृष्ठ हैं, जिनमें दर्जनों सिफारिशें दी गई हैं। हार्वर्ड का कहना है कि वह इनमें से कुछ सिफारिशों को, विशेष रूप से दाखिले, नियुक्ति और अनुशासन प्रणालियों से जुड़ी सिफारिशों को, लागू करना शुरू करेगा।
प्रवेश नीति में बदलाव
हार्वर्ड ने अपनी “कार्रवाई और प्रतिबद्धताओं” की सूची में कहा है कि वह यह सुनिश्चित करेगा कि प्रवेश प्रक्रिया में छात्रों का मूल्यांकन केवल शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि विभिन्न विचारों से संवाद करने, सहानुभूति दिखाने और नागरिक चर्चा में भाग लेने की क्षमता के आधार पर भी किया जाए। हाल ही में एक नया आवेदन प्रश्न जोड़ा गया है, जिसमें छात्रों से पूछा जाता है कि उन्होंने कब किसी से दृढ़ असहमति जताई थी।
हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने हार्वर्ड से यह अपेक्षा की है कि वह “जाति, रंग, राष्ट्रीय मूल या इसके प्रॉक्सी” के आधार पर दी जाने वाली सभी प्राथमिकताओं को समाप्त करे और अगस्त तक योग्यता-आधारित नीतियां लागू करे। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज दाखिले में जाति के आधार के उपयोग को पहले ही खारिज कर दिया है।
शिक्षण और पाठ्यक्रम में सुधार
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हार्वर्ड को “उत्कृष्टता” के नए मानकों के आधार पर शिक्षकों का मूल्यांकन करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षण में राजनीतिक पक्षपात न हो। पाठ्यक्रमों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि वे बौद्धिक खुलेपन को बढ़ावा दें।
इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय यहूदी-विरोधी प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाएगा और हिब्रू, यहूदी, अरब और इस्लामी अध्ययन को बढ़ावा देगा। साथ ही, यहूदी-विरोध पर शोध परियोजनाओं और मुस्लिम, अरब व फिलिस्तीनी छात्रों से जुड़ी ऐतिहासिक पड़ताल के लिए भी फंडिंग की जाएगी।
राजनीतिक दबाव का विरोध
व्हाइट हाउस द्वारा विविध विचारों के प्रतिनिधित्व की मांग के जवाब में गार्बर ने कहा है कि हार्वर्ड किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने इसे अकादमिक स्वतंत्रता और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया।
हार्वर्ड ऐसा पहला प्रमुख विश्वविद्यालय है जो ट्रम्प प्रशासन की सार्वजनिक आलोचना का सामना करते हुए खुले तौर पर उसकी शर्तों को चुनौती दे रहा है।




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