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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दो भारतीय मूल के प्रोफेशनल्स को मिली अहम जिम्मेदारियां

जहाँ एक ओर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले भारतीय छात्रों का भविष्य अनिश्चितता के साए में है, वहीं दो भारतीय मूल के पेशेवरों को इस प्रतिष्ठित संस्थान की प्रशासनिक टीम में अहम भूमिकाएं सौंपी गई हैं।

अंजलि सूद बनीं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी बोर्ड की सदस्य
भारतीय मूल की प्रतिष्ठित व्यवसायी अंजलि सूद को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ ओवरसियर्स में नियुक्त किया गया है। उन्होंने मार्क कार्नी का स्थान लिया है, जिन्होंने हाल ही में इस पद से इस्तीफा दिया था।

कौन हैं अंजलि सूद?
वर्तमान में अंजलि सूद अमेरिका की प्रमुख OTT कंपनी Tubi की CEO हैं। इससे पहले उन्होंने वीडियो प्लेटफॉर्म Vimeo की CEO के रूप में कार्य किया और कंपनी को सफलतापूर्वक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कराया। उन्हें Fortune 40 Under 40 और World Economic Forum जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सम्मान मिल चुका है।

मिशिगन में जन्मीं अंजलि पंजाबी प्रवासी माता-पिता की संतान हैं। मात्र 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने मैसाचुसेट्स स्थित प्रतिष्ठित Phillips Academy में पढ़ाई शुरू की। इसके बाद उन्होंने Wharton School (University of Pennsylvania) से फाइनेंस में डिग्री प्राप्त की और फिर 2011 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से MBA किया।

वे कहती हैं, “मेरे माता-पिता मुझे अमेरिका इसलिए लाए ताकि मैं एक सपना जी सकूं। अब मेरी कोशिश है कि मैं अगली पीढ़ी के लिए रास्ता खोल सकूं।”

कितनी है अंजलि सूद की संपत्ति?
रिपोर्ट के अनुसार, अंजलि सूद की कुल संपत्ति वर्तमान में $8.52 मिलियन (लगभग ₹70 करोड़) है। वे न्यूयॉर्क में रहती हैं। डिजिटल और मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी उनकी विशेषज्ञता हार्वर्ड की बदलती जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर उस समय जब यूनिवर्सिटी राजनीतिक दबाव में है।

संजय सेठ को भी मिली अहम भूमिका
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक संरचना में एक और भारतीय मूल के प्रोफेशनल संजय सेठ को हार्वर्ड एलुमनाई एसोसिएशन का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 जुलाई से शुरू होगा।

हार्वर्ड और ट्रंप प्रशासन के बीच चल रहा विवाद
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों की संख्या 15% तक सीमित करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि, “हमारे अपने लोगों को दाखिला नहीं मिल पाता, क्योंकि विदेशी छात्र सीटें ले जाते हैं।”

इस प्रस्ताव से भारतीय छात्रों पर बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल हार्वर्ड में लगभग 788 भारतीय छात्र मास्टर्स और PhD कार्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। यदि यह नीति लागू होती है, तो हजारों भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में उच्च शिक्षा का सपना अधूरा रह सकता है।

हालांकि, इस आदेश पर यूएस डिस्ट्रिक्ट जज एलिसन डी. बरो ने फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे छात्रों को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

जहां एक ओर भारतीय छात्रों को अमेरिका में शिक्षा प्राप्त करने में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर अंजलि सूद और संजय सेठ जैसे भारतीय मूल के पेशेवरों की हार्वर्ड प्रशासन में बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि वैश्विक नेतृत्व में भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार सशक्त हो रही है।

Asmita Sarkar

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