
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी (UGC) ने देशभर के जिन 157 सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों को लोकपाल नियुक्त नहीं करने पर डिफाल्टर घोषित किया है, उस सूची में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भी शामिल है। हालांकि सेवानिवृत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश सुनरया को इस सूची के जारी होने से काफी पहले 7 जून को ही माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में लोकपाल नियुक्त कर दिया गया था। इसके बावजूद इस विश्वविद्यालय को डिफाल्टर की लिस्ट में डाल दिया गया।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय ने इस सम्बन्ध में जो आदेश जारी किया था, उसमें स्पष्ट लिखा है कि यूजीसी द्वारा प्रदत्त दिशा निर्देशों के परिपालन में जारी विज्ञापन के आधार पर प्राप्त आवेदनों का विवि में गठित समिति की अनुशंसा अनुसार सुनरया लोकपाल के पद पर नियुक्त किए गए हैं। नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 3 वर्ष की अवधि तक के लिए है।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केजी सुरेश का कहना है कि लोकपाल की नियुक्ति के आदेश चुनाव आचार संहिता के चलते जारी नहीं किए जा सके थे। चुनाव सम्पन्न होने के बाद 7 जून को लोकपाल की नियुक्ति के आदेश विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए जा चुके हैं। प्रो.सुरेश ने कहा कि इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भी जानकारी दी जा चुकी है।
बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मध्य प्रदेश की 7 सरकारी और 9 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को डिफॉल्टर घोषित किया था।




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