
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने कॉलेजों से लगातार दो सैद्धांतिक या व्यावहारिक (Theory or Practical) वैल्यू एडीशन कोर्सेज (VAC) आयोजित न करने का निर्देश दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) का कहना है कि “यह इसलिए किया गया क्योंकि कुछ कॉलेज लगातार दो मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम (VAC) कक्षाएं निर्धारित कर रहे थे। यह कदम छात्रों के सीखने के अनुभवों के लिए हानिकारक होगा।”
विश्वविद्यालय ने अधिसूचना में कहा, “इस बात को ध्यान में रखते हुए, यह सलाह दी जाती है कि मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम अनुसूची में लगातार दो सैद्धांतिक/व्यावहारिक कक्षाएं शामिल नहीं होनी चाहिए। कॉलेजों को मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रमों के लिए प्रतिदिन दो घंटे से अधिक समय आवंटित नहीं करना चाहिए।”
विश्वविद्यालय ने कॉलेजों से कहा है कि इन निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन किया जाना चाहिए। हालांकि, नए दिशा-निर्देशों को अकादमिक समुदाय के भीतर से काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। उनका कहना है कि इससे कॉलेजों में “अराजकता पैदा होगी” क्योंकि समय-सारिणी लगभग तय हो चुकी है और कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं के अनुसार वीएसी पेपर उपलब्ध हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद के सदस्य मिथुराज धुसिया ने इसे केवल दिखावटी बदलाव करार देते हुए कहा कि ये पर्याप्त नहीं हैं। धुसिया ने कहा, “छात्र और शिक्षक लगातार इन VAC पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता पर सवाल उठा रहे हैं, ऐसे समय में जब अनुशासन-विशिष्ट विशेषज्ञता के लिए अधिक समय समर्पित करने की आवश्यकता है।”
वहीं वाम समर्थित डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट की सचिव आभा देब हबीब ने कहा कि विश्वविद्यालय ने वीएसी पाठ्यक्रम के लिए लगातार चार घंटे निर्धारित करने के लिए कॉलेजों को दोषी ठहराया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अधिसूचना इस तथ्य पर चुप है कि ये निर्णय कॉलेजों द्वारा नहीं बल्कि क्लस्टर समन्वयकों द्वारा लिए जाते हैं जिन्हें विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त किया जाता है।




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