
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एक डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने के निर्देश भी दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। यह निर्णय राज्य पुलिस और प्रशासन द्वारा मामले को संभालने को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।
हाईकोर्ट ने घटना के पांच दिन बाद भी पर्याप्त प्रगति न होने का हवाला देते हुए जांच की प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की, “प्रशासन पीड़ित या पीड़ित के परिवार के साथ नहीं था। 5 दिन बाद भी जांच में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है।”
मामले को सीबीआई को सौंपने का अदालत का निर्णय वर्तमान जांच प्रक्रिया में उसके विश्वास की कमी को दर्शाता है, जिसकी अप्रभावीता और स्पष्ट देरी के लिए आलोचना की गई है।
जांच के तबादले का आदेश देने के अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के हाल ही में उस कॉलेज के प्रिंसिपल को तबादला करने के फैसले पर भी गंभीर सवाल उठाए, जहां पीड़िता कार्यरत थी। अदालत ने पूछा, “उसे दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल बनाने की क्या जल्दी थी? उसे उसके सभी कर्तव्यों से मुक्त कर दिया जाना चाहिए था।” अदालत ने कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए किसी के पद से इस्तीफा देने के बाद उसकी किसी और सरकारी कॉलेज में नियुक्ति कैसे की जा सकती है। अदालत ने सुझाव दिया कि तबादला शायद व्यक्तियों को जांच या जिम्मेदारी से बचाने का प्रयास हो सकता है।
बता दें, आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के प्रिंसिपल पद से प्रोफेसर (डॉ.) संदीप घोष ने कल इस्तीफा दे दिया था। उसके कुछ ही समय बाद ही उन्हें कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में नियुक्त कर दिया गया था।
अदालत का बयान जांच में संभावित प्रशासनिक हस्तक्षेप के बारे में चिंताओं को उजागर करता है और पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
विचाराधीन मामला एक युवा डॉक्टर के क्रूर बलात्कार और हत्या से जुड़ा है, जिसका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया है, जिसमें पीड़िता के लिए त्वरित न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। राज्य सरकार के आलोचकों ने उस पर पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा करने में विफल रहने और पूरी जांच सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है।




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