
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेडिकल क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए छात्रों के विदेश जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि केंद्र का लक्ष्य शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाना है ताकि छात्रों को बाहर न जाना पड़े। 78वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक विदेशी छात्र भारत आकर पढ़ाई करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ”नई शिक्षा नीति के अंतर्गत हम देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं कि मेरे देश के नौजवानों को विदेश न जाना पड़े, मध्यमवर्गीय परिवारों को लाखों-करोड़ रुपये खर्च न करने पड़ें। हम यहां ऐसे संस्थानों का निर्माण करना चाहते हैं जहां विदेशों से लोग भारत आएं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 75,000 मेडिकल सीटें बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा, “आज भी, ज्यादातर मध्यम वर्ग के बच्चे मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जा रहे हैं। वे विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई पर लाखों खर्च करते हैं। हर साल लगभग 25,000 युवा मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं और वे ऐसे देशों में जाते हैं, जिनके बारे में सुनकर मुझे आश्चर्य होता है। इसलिए हमने तय किया है कि अगले पाँच सालों में मेडिकल लाइन में 75,000 नई सीटें बनाई जाएंगी।”
पीएम मोदी ने कहा, ”अभी-अभी हमने बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्निर्माण किया है। नालंदा विश्वविद्यालय ने फिर एक बार काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन हमें शिक्षा के क्षेत्र में फिर एक बार सदियों पुराने उस नालंदा स्पिरिट को जगाना होगा, उस नालंदा स्पिरिट को जीना होगा, हमें उस नालंदा स्पिरिट को लेकर बड़े विश्वास के साथ विश्व के ज्ञान की परंपराओं को नई चेतना देने का काम करना होगा।”




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