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NMC की रिपोर्ट में देशभर के डॉक्टरों का वेतनमान दिल्ली एम्स की तरह करने की वकालत

राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) के टास्क फोर्स ने देशभर के डॉक्टरों के कामकाज को लेकर कई अहम सिफारिशें की हैं। टास्क फोर्स का कहना है कि रेजिडेंट डाक्टरों से सप्ताह में 74 घंटे से अधिक काम नहीं लेना चाहिए। साथ ही टास्क फोर्स की रिपोर्ट में सभी डॉक्टरों का वेतनमान दिल्ली एम्स के स्तर के होने की वकालत की गई है।

एनएमसी की ‘नेशनल टास्क फोर्स ऑन मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग ऑफ मेडिकल स्टूडेंट्स’ ने अपनी नीतियों के मानकीकरण की मांग की है। अपनी रिपोर्ट में यूजीसी और एआईसीटीई वेतनमान का हवाला देते हुए एनएमसी की टास्क फोर्स ने प्रस्ताव दिया है कि इक्विटी सुनिश्चित करने और नौकरी से संतुष्टि को बढ़ावा देने के लिए सभी चिकित्सकों के लिए एम्स, दिल्ली की वेतनमान संरचना और सेवानिवृत्ति नीति को अपनाया जाना चाहिए। चाहे वे निजी हों, सार्वजनिक हों, राज्य हों, केंद्रीय, डीम्ड विश्वविद्यालय, या किसी अन्य प्रकार का संस्थान।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चिकित्सा शिक्षा की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा शिक्षकों के लिए निजी प्रैक्टिस को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है, “संस्थानों में वेतनमान, सेवानिवृत्ति और रोटेशनल हेडशिप नीतियों का मानकीकरण समानता सुनिश्चित करता है और उच्च गुणवत्ता वाले संकाय को आकर्षित करता है। चिकित्सा शिक्षकों के लिए निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने और गैर-प्रैक्टिस भत्ते प्रदान करने से शिक्षा की गुणवत्ता और अखंडता को बनाए रखा जा सकता है।”

मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स ने सिफारिशों में कहा है कि डाक्टरों को हर सप्ताह एक दिन की छुट्टी मिलनी चाहिए। मेडिकल छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद आवश्यक है। अधिक समय तक काम करना डाक्टरों की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। इससे मरीजों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। यदि काम अधिक हो तो अस्पताल या मेडिकल कालेज अधिक चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्त करे। स्नातकोत्तर छात्र और इंटर्न का मुख्य उद्देश्य डाक्टरों की कमी को दूर करना नहीं बल्कि शिक्षा प्राप्त करना है। मेडिकल का कोई छात्र जब स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला लेता है तो उसे रेजिडेंट डाक्टर कहा जाता है।

टास्क फोर्स ने यह भी कहा कि रैगिंग पर एनएमसी के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। मेडिकल कालेजों में एंटी-रैगिंग सेल होने चाहिए। रैगिंग करने वाले अपराधियों को कठोर दंड मिले। टास्कफोर्स ने निष्पक्ष और मानकीकृत ग्रेडिंग सिस्टम, स्वतंत्र अपील प्रक्रिया पर जोर दिया है। शैक्षणिक दबाव कम करने, पूरक परीक्षाएं शुरू करने की भी सिफारिश की है। गोपनीयता बढ़ाने, निष्पक्ष शैक्षणिक माहौल को बढ़ावा देने के लिए रोल नंबर का उपयोग कर परीक्षा परिणाम घोषित करने का भी सुझाव दिया है। 

 

Asmita Sarkar

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