Edinbox Hindi

उपराष्ट्रपति ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बताया गेमचेंजर, कहा- इसे अब तक नहीं अपनाने वाले राज्य करें पुनर्विचार

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) एक गेमचेंजर है और जिन राज्यों ने अभी तक नीति नहीं अपनाई है, उन्हें अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।

धनखड़ ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन लोगों के खिलाफ आगाह किया जो भारत की संस्थाओं की छवि धूमिल करते हैं। उन्होंने लोगों से उन “गुमराह व्यक्तियों” को रोशनी दिखाने का आग्रह किया जो देश के प्रभावशाली विकास को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम जल्द से जल्द 100 प्रतिशत साक्षरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता और जुनून के साथ मिशन मोड में आएं।

धनखड़ ने कहा, “शिक्षा एक ऐसी चीज़ है जिसे कोई चोर आपसे नहीं छीन सकता। कोई भी सरकार इसे आपसे नहीं छीन सकती। न तो रिश्तेदार और न ही दोस्त इसे आपसे छीन सकते हैं। इसमें कोई कमी नहीं हो सकती। यह तब तक बढ़ती रहेगी और बढ़ती रहेगी जब तक आप इसे साझा करते रहें। यदि साक्षरता का उत्साहपूर्वक अनुसरण किया जाए, तो भारत नालंदा और तक्षशिला की तरह शिक्षा के केंद्र के रूप में अपनी प्राचीन स्थिति को पुनः प्राप्त कर सकता है।”

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को अपनाने वाले राज्यों से अपने रुख पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह नीति देश के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा, ‘यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे युवाओं को उनकी प्रतिभा और ऊर्जा का पूरा इस्तेमाल करने का अधिकार देती है, जिसमें सभी भाषाओं को उचित महत्व दिया जाता है।’

मातृभाषा के विशेष महत्व पर प्रकाश डालते हुए धनखड़ ने कहा कि यही वह भाषा है जिसमें लोग सपने देखते हैं। उपराष्ट्रपति ने भारत की अद्वितीय भाषाई विविधता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “दुनिया में भारत जैसा कोई देश नहीं है। जब भाषा की समृद्धि की बात आती है तो हम कई भाषाओं के साथ एक अद्वितीय राष्ट्र हैं।”

धनखड़ ने सभी से कम से कम एक व्यक्ति को साक्षर बनाने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जब हम किसी को साक्षर बनाते हैं, तो हम उसे मुक्त करते हैं, हम उस व्यक्ति को खुद को खोजने में मदद करते हैं, हम उसे गरिमा का एहसास कराते हैं, हम निर्भरता कम करते हैं, हम स्वतंत्रता और परस्पर निर्भरता पैदा करते हैं। यह एक व्यक्ति को खुद की मदद करने में सक्षम बनाता है।”

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed