विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रतियोगिता और कार्यशाला ‘फोटोमेनिया 3.0’ का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के विश्वविद्यालयों और मीडिया शिक्षण संस्थानों से कुल 304 प्रविष्टियां मिलीं। प्रतियोगिता में यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी दूसरे और जयपुर के बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेस तीसरे स्थान पर रहा। विजेताओं को ट्रॉफी, नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य युवा फोटोग्राफरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना और फोटोग्राफी के माध्यम से समाज, संस्कृति तथा पर्यावरण से जुड़ी कहानियों को सामने लाना था। प्रतियोगिता के साथ आयोजित कार्यशाला में विद्यार्थियों को फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की बारीकियों से भी परिचित कराया गया।
फोटोग्राफी इतिहास और संस्कृति को सहेजने का माध्यम
विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट एवं कुलपति प्रो. (डॉ.) डीवीएस भगवानुलु ने कहा कि फोटोग्राफी केवल तस्वीर खींचने तक सीमित नहीं है। यह इतिहास, संस्कृति और लोगों की भावनाओं को सहेजने का एक प्रभावी माध्यम है। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद फोटोग्राफर की अपनी सोच, संवेदनशीलता और विषय को समझने की क्षमता का महत्व बना रहेगा।
उन्होंने युवाओं को फोटोग्राफी को केवल तकनीकी कौशल के रूप में नहीं, बल्कि अपनी बात और विचार लोगों तक पहुंचाने के माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
फोटो प्रदर्शनी में दिखी समाज और संस्कृति की विविधता
प्रतियोगिता में भारतीय समाज, लोक संस्कृति, वन्यजीव, पर्यावरण और स्ट्रीट लाइफ से जुड़ी तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में लगी फोटो प्रदर्शनी में तस्वीरों की फ्रेमिंग, रोशनी और प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इन तस्वीरों के जरिए प्रतिभागियों ने अपने आसपास की दुनिया को अलग-अलग नजरियों से पेश किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुतियां भी दीं। इससे आयोजन में कला और संस्कृति का रंग देखने को मिला।
कार्यशाला में फोटो पत्रकारिता और विजुअल स्टोरीटेलिंग की जानकारी
कार्यशाला में क्रिएटिव हेड प्रतीश माथुर ने विद्यार्थियों को फोटो पत्रकारिता, फ्रेमिंग, विजुअल स्टोरीटेलिंग और डिजिटल फोटोग्राफी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक प्रभावशाली तस्वीर बिना शब्दों के भी अपनी बात लोगों तक पहुंचा सकती है। इसके लिए तस्वीर लेने वाले को विषय की अच्छी समझ, सही समय और उचित फ्रेमिंग पर ध्यान देना चाहिए।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि तस्वीरें केवल किसी घटना या दृश्य को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे किसी कहानी, भावना या सामाजिक मुद्दे को प्रभावी ढंग से सामने ला सकती हैं।
विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों में भाग लेने की सलाह
विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) प्रमोद फौजदार ने कहा कि पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने से विद्यार्थियों के कौशल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। उन्होंने युवाओं से अपनी कला और प्रतिभा का इस्तेमाल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने की अपील की।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष दीपक प्रसाद ने कहा कि ‘फोटोमेनिया’ का तीसरा संस्करण युवा फोटोग्राफरों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान कर रहा है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता विकसित करने और दूसरे प्रतिभागियों के अनुभवों से सीखने का अवसर देते हैं।
आयोजन समिति ने जताया आभार
कार्यक्रम में विभाग के प्रो-एचओडी डॉ. हर्ष तोमर सहित विश्वविद्यालय के अन्य सदस्य मौजूद रहे। डॉ. तोमर ने अतिथि प्रतीश माथुर, कुलपति प्रो. (डॉ.) डीवीएस भगवानुलु, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) प्रमोद फौजदार, विभागाध्यक्ष दीपक प्रसाद, प्रतिभागियों, संकाय सदस्यों और आयोजन समिति में शामिल विद्यार्थियों का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि आयोजन की सफलता भविष्य में इस तरह के बड़े कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रेरणा देगी।
‘फोटोमेनिया 3.0’ जैसे आयोजन पत्रकारिता और जनसंचार के विद्यार्थियों के लिए खास महत्व रखते हैं। इनके जरिए युवा न केवल फोटोग्राफी का अभ्यास करते हैं, बल्कि समाज को देखने, घटनाओं को समझने और तस्वीरों के माध्यम से प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने की क्षमता भी विकसित करते हैं।




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