
केंद्र सरकार ने पांच और भारतीय भाषाओं को शास्त्रीय भाषा की सूची में शामिल कर लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषाओं को शास्त्रीय भाषा (क्लासिकल लैंग्वेज) का दर्जा दे दिया है। शास्त्रीय भाषाएं वह समृद्ध भाषाएं हैं जो भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को अपने में संजोए हुए प्रत्येक समुदाय को ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान करती हैं। शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद इन भाषाओं के लिए शैक्षिणिक और शोध क्षेत्र में महत्वपूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा इन भाषाओं के प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण से संग्रह, अनुवाद, प्रकाशन और डिजिटल मीडिया में रोजगार पैदा होंगे। पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद पीएम मोदी ने सभी को बधाई दी है।
दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का प्रस्ताव संस्कृति मंत्रालय की भाषा विशेषज्ञ समिति को भेजा था। इस बीच पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली भाषा को भी शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के प्रस्ताव मिले। विशेषज्ञ समिति ने इन भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की संस्तुति की। कैबिनेट के फैसले के बाद इन भाषाओं का व्यापक सांस्कृतिक, शैक्षिणिक प्रभाव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि हमारी सरकार भारत के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को संजोती है और उसका जश्न मनाती है। हम क्षेत्रीय भाषाओं को लोकप्रिय बनाने की अपनी प्रतिबद्धता में भी अटल रहे हैं। मुझे बेहद खुशी है कि कैबिनेट ने फैसला किया है कि असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत को शास्त्रीय भाषाओं का दर्जा दिया जाएगा। यह सुंदर भाषाएं हमारी जीवंत विविधता को उजागर करती हैं। इसके लिए सभी को बधाई।




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