
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला ने सामुदायिक सेवा और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए अपने उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के तहत अभिव्यक्ति अनुसंधान और विकास फाउंडेशन (एआरडीएफ), सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) कैंपस क्लब और एनसीसी के साथ साझेदारी में बिरसा प्रखंड के पोगराबहाल गांव में एक ‘दान और वितरण अभियान’ कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दिन, स्वयंसेवको ने गांव में लोगों को कपड़े, शैक्षिक सामग्री और आवश्यक घरेलू सामान वितरित किए। वितरण के साथ उन्होंने एसडीजी 12 के सिद्धांतों की जानकारी प्रदान करने के लिए आपसी विचार-विमर्श कार्यक्रम का भी आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वंचित वर्ग के लोगों का समर्थन करने के साथ संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 12: “जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन” की मूल भावना को बढ़ावा देना भी था।
एसडीजी 12 निरंतरता और दीर्घकालिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सतत उपभोग और उत्पादन वाली व्यवस्था पर जोर देता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वंचित ग्रामीणों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें नित्य जीवन में निरंतरता बनाये रखने हेतु समझदारीपूर्ण उपभोग के लिये जागरूक करना भी था।
इस अभियान का नेतृत्व प्रो. रामकृष्ण बिस्वाल (क्षेत्रीय समन्वयक-यूबीए ओड़िशा) और प्रो. अजीत बेहरा (पीआई समन्वयक, यूबीए, एनआईटी राउरकेला) सहित संकाय सदस्यों ने किया।
सामुदायिक कल्याण के लिए एकता और समर्पण की भावना के साथ 25 यूबीए स्वयंसेवकों और 54 एनसीसी कैडेटों ने इसमें भाग लिया। इस पहल के माध्यम से 130 से अधिक ग्रामीणों की तत्काल जरूरतों को पूरा कर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में उन्हें सहयोग किया गया।
2030 एसडीजी एजेंडा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता ने शैक्षणिक संस्थानों को अकादमिक शिक्षा से परे अपनी भूमिका का विस्तार करने और सामाजिक उत्थान में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है।
कार्यक्रम में शामिल होते हुए, डॉ. अंतरजीता नायक (संस्थापक निदेशक, एआरडीएफ) ने कहा, “यह अभियान केवल वितरण के बारे में नहीं था बल्कि हमारा उद्देश्य एक ऐसी संस्कृति को प्रेरित करना था जो जिम्मेदार उपभोग और सामुदायिक कल्याण को महत्व देती हो।”




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