
बदलापुर में स्कूल परिसर में दो नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न की घटना के बाद, बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा गठित एक विशेष समिति ने स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे और कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन को अनिवार्य करने की सिफारिश की है।
बुधवार को कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में, दो पूर्व हाईकोर्ट जजों की अध्यक्षता वाली समिति ने राज्य के सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुरक्षा सुधार से जुड़ी कई अहम सिफारिशें दी हैं।
स्कूलों के लिए प्रमुख सिफारिशें
समिति ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित सिफारिशें दी हैं:
– स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।
– सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
– स्कूलों द्वारा छात्रों के लिए सुरक्षित परिवहन की जिम्मेदारी ली जाए।
– बच्चों को “गुड टच” और “बैड टच” का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
– साइबर अपराधों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए।
– स्कूलों और प्रमुख स्थानों पर ‘1098’ (बच्चों की हेल्पलाइन) की जानकारी प्रदर्शित की जाए।
बुधवार को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और नीला गोखले की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह रिपोर्ट की समीक्षा करे और बताए कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने कहा, “हम भी रिपोर्ट को देखेंगे। राज्य सरकार को दो सप्ताह में जवाब देना होगा।”
क्या था मामला?
अगस्त 2024 में, बदलापुर के एक स्कूल में दो पांच वर्षीय लड़कियों के साथ स्कूल परिसर के शौचालय में एक पुरुष परिचारक ने यौन उत्पीड़न किया था। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन सितंबर में पुलिस की कथित जवाबी गोलीबारी में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का आदेश दिया था।
समिति की अन्य महत्वपूर्ण सिफारिशें
– स्कूलों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की कम से कम एक महीने की फुटेज अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखी जाए।
– अगर किसी कर्मचारी की आपराधिक पृष्ठभूमि पाई जाती है, तो उसे तुरंत नौकरी से हटा दिया जाए।
– प्री-प्राइमरी और प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को “गुड टच” और “बैड टच” का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
बदलापुर की इस घटना के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्कूलों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन सिफारिशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाती है।




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