
जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) के कार्यवाहक कुलपति भास्कर गुप्ता को रिटायरमेंट से चार दिन पहले ही हटा दिया गया। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन 27 मार्च को राजभवन से भेजे गए पत्र के जरिए उन्हें तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का आदेश दिया गया।
वेबकूपर सम्मेलन विवाद से जुड़ा मामला?
हाल के सप्ताहों में जादवपुर विश्वविद्यालय में वार्षिक वेबकूपर सम्मेलन को लेकर विवाद छिड़ा हुआ था, और इस दौरान कुलपति की भूमिका पर कई सवाल उठाए गए थे। यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसी विवाद के चलते उन्हें समय से पहले हटाया गया। हालांकि, इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं कि उन्हें सेवानिवृत्ति से महज चार दिन पहले ही क्यों हटाया गया?
राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि “यह सोच का दिवालियापन दर्शाता है।” उन्होंने यह भी बताया कि कलकत्ता विश्वविद्यालय और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में भी प्रशासनिक गतिरोध की स्थिति बनी हुई है और जादवपुर विश्वविद्यालय भी उसी दिशा में बढ़ रहा है।
भास्कर गुप्ता का बयान
भास्कर गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि राजभवन से मिले पत्र में उन्हें हटाने का कोई कारण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वविद्यालय से प्रेम है। जब विश्वविद्यालय मुझे बुलाएगा, मैं आ जाऊंगा।”
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले के पीछे का असल कारण क्या था और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे को किस तरह सुलझाता है।




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