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प्रेरणादायक है ‘स्मार्ट स्कूल’ की उपाधि प्राप्त पहलगाम के केन्द्रीय विद्यालय की कहानी

पहलगाम। जम्मू-कश्मीर का सुरम्य और शांत क्षेत्र। यह अलग बात कि इस वक़्त यह इलाका आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत को लेकर सुर्ख़ियों में है। पहलगाम को अधिकतर लोग पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित क्षेत्र के रूप में की जानते-पहचानते हैं, लेकिन यहाँ एक और ऐसी चीज़ है जिसे लेकर गर्व की अनुभूति की जा सकती है। और वह है, एक नदी के किनारे स्थित केन्द्रीय विद्यालय, पहलगाम। यह पहलगाम के लोगों के लिए एक उपहार सरीखा है।

इस केन्द्रीय विद्यालय को पहलगाम के पहले स्मार्ट स्कूल होने का गौरव भी हासिल है। यह स्कूल आज न केवल इस क्षेत्र का शैक्षिक केंद्र बन चुका है, बल्कि “स्मार्ट स्कूल” की उपाधि प्राप्त कर राज्यभर में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। पहलगाम बाज़ार से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह स्कूल वर्ष 2003 में कक्षा I-V से शुरू हुआ था। वर्तमान में दसवीं तक की कक्षाएं हैं। समर्पित शिक्षकों का एक समूह यहां शिक्षा और बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व को हर तरह से विकसित करने के लिए काम करने में सतत लगा है।

बहरहाल, स्मार्ट स्कूल बनने के लिए केन्द्रीय विद्यालय, पहलगाम ने कई आधुनिक तकनीकी और शैक्षणिक सुविधाओं को अपनाया है। स्कूल में इंटरएक्टिव डिजिटल क्लासरूम की सुविधा है, जहाँ पढ़ाई स्मार्ट बोर्ड, प्रोजेक्टर और ऑडियो-विजुअल कंटेंट की मदद से की जाती है। छात्रों को “DIKSHA” और “KVS Learning Portal” जैसे राष्ट्रीय ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे उनकी पढ़ाई कहीं भी, कभी भी संभव हो सकी है। स्कूल परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हैं, जिनमें सीसीटीवी निगरानी प्रमुख है। इसके साथ ही सोलर पैनल, वर्षा जल संचयन और प्लास्टिक मुक्त अभियान जैसे ग्रीन इनिशिएटिव्स भी चलाए जा रहे हैं, जो बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बना रहे हैं।

इस विद्यालय का उद्देश्य रक्षा और अर्धसैनिक बलों के कार्मिकों सहित स्थानांतरित होने वाले केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं को शिक्षा का एक साझा कार्यक्रम प्रदान करके पूरा करना है। लेकिन यहाँ स्थानीय बच्चे भी मौजूद हैं और शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह विद्यालय सिर्फ तकनीकी अपग्रेडेशन तक सीमित नहीं है। यहां शिक्षण विधियों में नवाचार को प्रमुखता दी गई है। छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग का अवसर मिलता है। विविध भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े छात्रों की उपस्थिति के कारण यहां एक समावेशी और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करने वाला वातावरण बनता है। 

पहलगाम जैसे संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्र में केन्द्रीय विद्यालय की मौजूदगी केवल शिक्षा का केंद्र बनकर नहीं रह गई, बल्कि यह एक सांस्कृतिक पुल, सामाजिक प्रेरणा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन चुका है। आतंकी हमलों के बावजूद विद्यालय प्रशासन और शिक्षकगण बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट न आने देने के लिए संकल्पित हैं।

स्थानीय अभिभावकों और छात्रों की प्रतिक्रिया भी इस स्कूल की सफलता का प्रमाण है। एक अभिभावक का कहना है, “हम पहलगाम में रहकर भी अपने बच्चों को वही शिक्षा दिलवा पा रहे हैं जो दिल्ली या मुंबई में मिलती है। यह स्कूल हमारे बच्चों का भविष्य बदल रहा है।” वहीं एक छात्र कहता है, “स्मार्ट क्लास में पढ़ना मजेदार भी है और आसान भी। अब हमें चीज़ें जल्दी समझ में आती हैं।”

केन्द्रीय विद्यालय, पहलगाम केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में बदलते शैक्षणिक परिदृश्य का प्रतीक है। यह संस्था साबित करती है कि यदि सही संसाधन, सही दृष्टिकोण और समर्पित शिक्षक हों, तो किसी भी क्षेत्र को शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा सकता है — चाहे वो पहलगाम जैसी चुनौतीपूर्ण जगह ही क्यों न हो। वैसे भी 1963 में एक साधारण सी शुरुआत करने वाला केन्द्रीय विद्यालय संगठन आज स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक प्रेरणादायक संस्थान बनकर उभरा है और बढ़ते हुए वर्षों के साथ निरंतर नवाचार और सृजन की कहानी लिख रहा है।

Asmita Sarkar

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