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मिजोरम बना भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य, हासिल की 98.2% साक्षरता दर

देश की शैक्षिक यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण आया जब मिजोरम ने ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) पहल के अंतर्गत भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया। इस उपलब्धि की औपचारिक घोषणा मुख्यमंत्री ललदूहोमा ने मिजोरम विश्वविद्यालय (MZU) में आयोजित एक विशेष समारोह में की।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी और मिजोरम के शिक्षा मंत्री डॉ. वानललथलाना विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री का संबोधन: एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर
मुख्यमंत्री ललदूहोमा ने इस अवसर को “राज्य की यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन” बताया, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। उन्होंने कहा, “यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है, जो हमारे नागरिकों की सामूहिक इच्छाशक्ति, अनुशासन और दूरदृष्टि को दर्शाता है।”

उन्होंने विशेष रूप से उन 1,692 नागरिकों की सराहना की जिन्होंने पहले शिक्षा का अवसर खो दिया था, लेकिन बाद में दृढ़ संकल्प और सीखने की भावना के साथ पढ़ना-लिखना सीखा।

नया युग, नई दिशा
मुख्यमंत्री ने इसे किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत बताया — एक ऐसा युग जो अवसर, सशक्तिकरण और समावेशन से परिपूर्ण होगा। उन्होंने डिजिटल साक्षरता, वित्तीय ज्ञान और उद्यमिता कौशल को हर मिजो तक पहुँचाने का आह्वान किया और कहा: “हमें गर्व है कि हमने शुरुआत की है। अब हमारा लक्ष्य है — सर्वश्रेष्ठ बनकर आगे बढ़ना।”

जयंत चौधरी: “यह पूरे देश के लिए गर्व का दिन”
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने मिजोरम की इस उपलब्धि को संपूर्ण भारत के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने मिजोरम के समावेशी दृष्टिकोण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और विश्वास जताया कि राज्य आजीवन शिक्षा और कौशल विकास में देश का मार्गदर्शन करता रहेगा।

समारोह की अध्यक्षता मुख्य सचिव खिल्ली राम मीणा ने की, जिन्होंने राज्य की इस ऐतिहासिक सफलता की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की।

कैसे मिली पूर्ण साक्षरता की मान्यता?
ULLAS पहल के अंतर्गत, भारत सरकार द्वारा 95% या उससे अधिक साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता का मानक माना गया है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2023–24 के अनुसार मिजोरम की साक्षरता दर 98.2% है। पुरुष साक्षरता 99.2% और महिला साक्षरता 97% है। 

यह उपलब्धि समग्र शिक्षा अभियान, नव भारत साक्षरता कार्यक्रम और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण की सतत कोशिशों का परिणाम है।

राज्य सरकार ने इस मिशन के लिए एक गवर्निंग काउंसिल और कार्यकारी समिति गठित की। SCERT के अंतर्गत राज्य साक्षरता केंद्र की स्थापना की गई, जहाँ मिजो भाषा में शिक्षण सामग्री विकसित की गई और लॉंगतलाई ज़िले के लिए अंग्रेज़ी संस्करण भी तैयार किया गया।

यह सफलता ऐसे बनी संभव
क्लस्टर रिसोर्स सेंटर समन्वयकों (CRCCs) ने 3,026 निरक्षरों की पहचान की। इनमें से 1,692 लोगों ने पढ़ने की इच्छा दिखाई। 292 स्वयंसेवी शिक्षकों ने स्कूलों, सामुदायिक केंद्रों, YMA पुस्तकालयों और घरों में शिक्षण कक्षाएँ संचालित कीं।

मिजोरम की यह उपलब्धि केवल राज्य की नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणास्रोत है। यह दर्शाता है कि जब इच्छाशक्ति, नेतृत्व और जन-भागीदारी साथ आते हैं, तब शिक्षा के क्षेत्र में असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

Asmita Sarkar

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