
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कार्यकारिणी परिषद के गठन में देरी को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को 29 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तिथि तक जवाब नहीं आता, तो वह ऐसा आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगा जो प्रतिवादियों के पक्ष में नहीं होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने याची हरिकेश बहादुर सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने बीएचयू में कार्यकारिणी परिषद के शीघ्र गठन की मांग की है। उनका तर्क है कि परिषद ही विश्वविद्यालय में नियम निर्माण, वित्तीय निर्णय और नियुक्तियों जैसे अहम कार्यों की अधिकारिक संस्था है। इसके अभाव में सभी निर्णय कुलपति द्वारा लिए जा रहे हैं, जो नियमानुसार अनुचित है।
कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार की ओर से पहले भी कई बार व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर समय मांगा गया था और मामला 16 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया था। अब जबकि उस तिथि को ढाई महीने से अधिक समय बीत चुका है, केंद्र की ओर से फिर से समय मांगा गया। अदालत को यह भी बताया गया कि शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को सूचना देने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कोर्ट ने इस रवैये पर नाराजगी जताई और स्पष्ट रूप से अंतिम अवसर देते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब नहीं दिया गया, तो अदालत आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगी। अगली सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित है।




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