
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने एक कॉलेज कार्यक्रम के दौरान छात्रों को एक स्पष्ट और प्रभावशाली संदेश देते हुए कहा कि युवाओं को नफरत और हिंसा के प्रतीक नाथूराम गोडसे की विचारधारा से बचना चाहिए और इंसानियत, समानता और सामाजिक न्याय की राह पर चलना चाहिए, जो गांधी, आंबेडकर और पेरियार ने दिखाया था।
कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मैं आपसे राजनीति करने के लिए नहीं कह रहा, लेकिन राजनीति की समझ रखना आज के दौर में जरूरी है। आपको गोडसे के खेमे में कभी नहीं जाना चाहिए।”
राजनीति की जागरूकता जरूरी, भागीदारी नहीं
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों में धकेलना नहीं है, बल्कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि छात्र देश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति की समझ विकसित करें।
उन्होंने कहा, “राजनीति हर चीज को प्रभावित करती है — आपकी शिक्षा, आपकी नौकरी, आपका भविष्य। इसलिए राजनीति की बुनियादी समझ होना समय की मांग है।”
“तमिलनाडु की ताकत उसकी एकजुटता है”
स्टालिन ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे “स्थायी संपत्ति” बताया और कहा कि यदि तमिलनाडु एकजुट रहता है, तो कोई भी शक्ति उसे हरा नहीं सकती।
“शिक्षा वह हथियार है जो आपको किसी भी लड़ाई में विजयी बना सकता है — यह आपकी सबसे बड़ी पूंजी है,” उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा।
छात्रों को दिया सामाजिक चेतना का संदेश
मुख्यमंत्री का यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं था, बल्कि उन्होंने छात्रों को सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि आने वाली पीढ़ी न केवल डिग्रियां ले, बल्कि विचारशील, संवेदनशील और जागरूक नागरिक भी बने।




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