
केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में साफ किया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए नए मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी या एमबीबीएस सीटों में वृद्धि पर रोक लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। यह जानकारी स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एनएमसी की रिपोर्ट के आधार पर दी।
पारदर्शी प्रक्रिया से मंजूरी
अनुप्रिया पटेल ने लिखित जवाब में बताया कि एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में सीटों की स्वीकृति से जुड़े आवेदनों के आकलन और मंजूरी के लिए एक व्यवस्थित और पारदर्शी प्रक्रिया लागू की है। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) हर साल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन आमंत्रित करता है।
इन आवेदनों में नए मेडिकल कॉलेज/संस्थान खोलने, मौजूदा संस्थानों में स्नातक (UG) सीटें बढ़ाने, नए स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम शुरू करने या मौजूदा पीजी सीटों में वृद्धि जैसी मांगें शामिल होती हैं। पूरी प्रक्रिया एनएमसी एक्ट, 2019 और एस्टैब्लिशमेंट ऑफ मेडिकल इंस्टीट्यूशंस, असेसमेंट एंड रेटिंग रेगुलेशंस 2023 के प्रावधानों के तहत संचालित होती है।
कड़े मानकों के आधार पर मूल्यांकन
पटेल ने कहा कि आवेदन करने वाले संस्थानों को अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) या पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (PGMEB) द्वारा तय न्यूनतम मानकों को पूरा करना अनिवार्य है।
आवेदन मिलने के बाद MARB प्रारंभिक जांच करता है। किसी कमी की स्थिति में संबंधित संस्थान को कारण बताओ नोटिस (SCN) जारी किया जाता है, ताकि खामियों को सुधारा जा सके।
निष्पक्ष और डिजिटल मूल्यांकन
निष्पक्षता बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ परीक्षकों का चयन यादृच्छिक ढंग से किया जाता है। मूल्यांकन के लिए विभिन्न आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे
– डिजिटल दस्तावेज़ जांच
– आधार आधारित उपस्थिति रजिस्टर
– लाइव वीडियो फीड और तस्वीरों की पुष्टि
– अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) का डेटा
– अचानक शारीरिक निरीक्षण
यदि मूल्यांकन में अतिरिक्त कमियां मिलती हैं, तो एनएमसी एक्ट की धारा 28 (उपधारा 3) के तहत संस्थान को दोबारा नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाता है।
अनुमति केवल मानकों के पालन पर
पटेल ने स्पष्ट किया कि Letter of Permission उन्हीं संस्थानों को दिया जाता है जो एनएमसी एक्ट, 2019 और उससे जुड़े सभी नियमों एवं दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करते हैं।




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