
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित रोजगार महाकुंभ 2025 का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि प्रदेश में हर कार्यरत युवा को न्यूनतम वेतन की गारंटी दी जाएगी। अब कोई भी कंपनी या नियोक्ता कर्मचारियों का शोषण नहीं कर सकेगा। नियुक्ति करने वाले संस्थानों को न्यूनतम वेतन देना अनिवार्य होगा और अतिरिक्त खर्च का वहन सरकार करेगी।
देश का पहला राज्य बना यूपी
योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन रहा है, जहां प्रत्येक कामकाजी युवा को न्यूनतम मजदूरी और न्यूनतम वेतन की गारंटी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत इसकी युवा आबादी है, जिसकी प्रतिभा की मांग वैश्विक स्तर तक बढ़ी है। कभी पलायन के लिए बदनाम उत्तर प्रदेश आज रोजगार और अवसर का केंद्र बन चुका है।
पलायन से अवसर की ओर
सीएम ने कहा कि पहले रोजगार की तलाश में पूरा गांव प्रदेश छोड़ देता था, लेकिन अब यूपी भीतर ही रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन रोजगार और विकसित भारत के संकल्प से जुड़ी है।
ODOP और MSME से मिली नई पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना ने पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान दिलाई है। प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र की 96 लाख इकाइयां सक्रिय हैं। कोरोना काल में जब 40 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक लौटे, तो इन्हीं इकाइयों ने लगभग 90% लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया।
सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते आठ वर्षों में 8.5 लाख युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां दी गईं। इनमें पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, लोक निर्माण और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां शामिल हैं।
15 लाख करोड़ का निवेश, 60 लाख को रोजगार
सीएम ने बताया कि सरकार ने पिछले आठ वर्षों में 33 से अधिक सेक्टोरियल नीतियां लागू कीं। इन्वेस्ट यूपी पोर्टल, निवेश मित्र और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी। नतीजतन 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रदेश में आया और इसके माध्यम से करीब 60 लाख युवाओं को रोजगार मिला।




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