
सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) की फीस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका अधिवक्ता सय्यम गांधी की ओर से दायर की गई थी, जिसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा ली जाने वाली परीक्षा फीस को असंवैधानिक बताया गया था।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता ने कहा था कि BCI सामान्य और ओबीसी वर्ग से ₹3,500 तथा एससी/एसटी वर्ग से ₹2,500 के साथ अतिरिक्त शुल्क भी लेता है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(g) (पेशे की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती है और एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24(1)(f) के भी खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट का मत
जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने में BCI को भारी खर्च उठाना पड़ता है, इसलिए शुल्क वसूली पूरी तरह उचित है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फीस व्यवस्था संविधान के किसी भी प्रावधान के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने यह याद दिलाया कि पहले भी याचिकाकर्ता को सलाह दी गई थी कि वे सीधे अदालत आने से पहले बार काउंसिल से संपर्क करें।
फीस वापसी की मांग भी खारिज
याचिकाकर्ता ने न केवल भविष्य में शुल्क वसूली पर रोक लगाने, बल्कि पहले से वसूली गई फीस लौटाने की भी मांग की थी। हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया कि BCI द्वारा तय की गई फीस कानूनी रूप से वैध है और इसमें कोई राहत नहीं दी जाएगी।




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