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मैनेजमेंट एजुकेशन को तेज़ी से बदलने की ज़रूरत है: प्रो. भरत भास्कर

मैनेजमेंट एजुकेशन को तेज़ी से बदलने की ज़रूरत है: प्रो. भरत भास्कर

IIMA के डायरेक्टर प्रो. भरत भास्कर से बातचीत

IIMA ने BT-MDRA की 26वीं वार्षिक रैंकिंग में देश के सर्वश्रेष्ठ बी-स्कूल का खिताब फिर हासिल किया है। इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर प्रो. भरत भास्कर के अनुसार, असली चुनौती यह नहीं कि संस्थान नंबर-वन है, बल्कि यह है कि मैनेजमेंट एजुकेशन को तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक बिज़नेस माहौल के अनुसार कितना तेज़ ढाल पाते हैं। उनसे हुई बातचीत के संपादित अंश: 

भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन की स्थिति को आप कैसे देखते हैं?

– हमारा मैनेजमेंट एजुकेशन इकोसिस्टम मजबूत है, लेकिन बदलाव बेहद तेज़ और व्यापक हैं। एआई, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स और ऑटोनॉमस सिस्टम जैसी तकनीकें कार्यस्थलों को गहराई से बदल रही हैं। इसलिए मैनेजमेंट एजुकेशन को वास्तविक कार्यस्थल की परिस्थितियों को तुरंत दर्शाना होगा—क्योंकि हम भविष्य के लीडर्स तैयार कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा पाठ्यक्रम से नए पाठ्यक्रम की ओर जाना कितनी तेजी से संभव हो सकेगा। ग्रेजुएट्स को बदलते सप्लाई चेन, वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता और नीतिगत बदलावों के लिए भी तैयार रहना होगा। हम अच्छी स्थिति में हैं, लेकिन अगर मैनेजमेंट एजुकेशन को प्रासंगिक बनाए रखना है तो बदलाव की रफ्तार और बढ़ानी होगी।

IIMA के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव क्या है?

– हमारा कोर्स इस तरह डिजाइन है कि छात्र वास्तविक इंडस्ट्री स्थितियों को समझें और भविष्य के बिज़नेस लीडर बनें। केस-स्टडी मेथड इसमें मुख्य भूमिका निभाता है, क्योंकि यह असल बिज़नेस चुनौतियों को क्लासरूम में लाता है।

कई बार तकनीक इंडस्ट्री से भी आगे निकल जाती है। इसलिए हम छात्रों को ऐसे लीडर बनने की ट्रेनिंग देते हैं जो इंडस्ट्री में नई तकनीकों को आगे बढ़ाएँ। पिछले साल हमने एआई इन ह्यूमन रिसोर्सेज, एआई-ड्रिवेन फिनटेक और टेक्नोलॉजी-बेस्ड ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे नए तकनीकी कोर्स शामिल किए हैं।

कभी इंडस्ट्री हमें आगे बढ़ाती है, और कभी हम इंडस्ट्री को—छात्रों को उन तकनीकों के लिए तैयार करके जो अभी कंपनियों ने अपनाई भी नहीं हैं।

क्या भारतीय मैनेजमेंट एजुकेशन बदलाव के लिए तैयार है?

– सिस्टम में कई स्तर हैं। टॉप संस्थान अविश्वसनीय तेजी से बदलाव अपना रहे हैं, जबकि कई अभी भी पीछे हैं। परिवर्तन पूरे इकोसिस्टम का होना चाहिए, ताकि फायदा केवल हाई-एंड इंडस्ट्री को नहीं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को मिले।

इस साल प्लेसमेंट को लेकर आपका आकलन क्या है? इंडस्ट्री और अकादमिक जगत कैसे प्रतिक्रिया दें?

– इंडस्ट्री से जुड़ाव सिर्फ प्लेसमेंट तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमारा ध्यान इंडस्ट्री-व्यवहार और वास्तविक प्रैक्टिस पर है। इसलिए कोर कोर्स फैकल्टी पढ़ाते हैं और कई इलेक्ट्रिव्स इंडस्ट्री विशेषज्ञ।

फैकल्टी को रिसर्च के साथ-साथ यह भी समझना चाहिए कि नई तकनीकें संगठनों को कैसे बदल रही हैं। हमारी कंसल्टिंग और एक्जीक्यूटिव एजुकेशन गतिविधियाँ फैकल्टी को कंपनियों की समस्याओं और समाधानों से जोड़े रखती हैं।

एक्जीक्यूटिव एजुकेशन में हम सिखाते जितना हैं, उतना सीखते भी हैं—इंडस्ट्री पेशेवर वास्तविक अनुभव लेकर आते हैं। इसलिए इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग जितना व्यापक होगा, प्लेसमेंट उतने ही स्वाभाविक रूप से बेहतर होंगे।

भविष्य का मैनेजमेंट क्लासरूम कैसा होगा?

– कोविड से पहले ही तकनीक ने हाइब्रिड और ऑनलाइन क्लासरूम को संभव बनाया था। महामारी ने इसे गति दे दी।

ब्लेंडेड लर्निंग दो कारणों से तेजी से बढ़ेगी:

  1. हमारी अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ रहा है—केवल नए ग्रेजुएट्स नहीं, बल्कि मौजूदा प्रोफेशनल्स को भी नई तकनीक और प्रबंधन कौशल में ट्रेनिंग की जरूरत है।
  2. लीडरशिप ट्रेनिंग की मांग बहुत अधिक है—मिड और सीनियर-मैनेजमेंट के लिए हाइब्रिड मॉडल सबसे उपयुक्त है।

यही कारण है कि हमने Blended Post Graduate Programme in Management (ब्लेंडेड MBA-इक्विवेलेंट प्रोग्राम) लॉन्च किया, जो अब दूसरे बैच में है। हम जल्द MBA in Business Analytics and AI भी शुरू कर रहे हैं, क्योंकि आज का मैनेजर टेक-सैवी होना जरूरी है। भारत को वैश्विक नेतृत्व देने के लिए ब्लेंडेड लर्निंग अब अनिवार्य है।

IIM अहमदाबाद के लिए आदर्श छात्र कैसा होना चाहिए?

– आदर्श उम्मीदवार वह है जो 1–2 साल का इंडस्ट्री अनुभव रखता हो, क्योंकि इससे वह संगठनात्मक व्यवहार समझ पाता है। ताज़ा ग्रेजुएट्स अक्सर इस हिस्से में संघर्ष करते हैं। IIT-ग्रेजुएट्स उपयुक्त हैं, लेकिन आदर्श छात्र केवल IIT से होना जरूरी नहीं। आज तकनीक को लागू करने की क्षमता ज्यादा मायने रखती है।

हमारा सिद्धांत है: Vidya Viniyoga Vikasa—यानी ज्ञान के उपयोग से विकास।

Commerce, Science या Arts—किसी भी बैकग्राउंड से छात्र आ सकता है, बशर्ते उसका माइंडसेट खुला हो और वह तकनीक को अपनाने व लागू करने के लिए तैयार हो।

क्या CAT एग्ज़ाम ऐसे छात्रों का चयन करने में मदद करता है?

– CAT एक फिल्टर की तरह काम करता है। शॉर्टलिस्ट के बाद इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन और केस राइटिंग से छात्र की सोच का आकलन किया जाता है। CAT विश्लेषणात्मक और भाषा कौशल की जांच करती है, जो बिज़नेस समस्याएँ हल करने में महत्वपूर्ण हैं।

IIMA के दुबई कैंपस के बाद मल्टी-कैंपस मॉडल को कैसे देखते हैं?

– भारत को ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना है। दुबई इस रणनीति का हिस्सा है—हमारे ज्ञान से वैश्विक दक्षिण को लाभ मिले और भारत के लिए भी नए अवसर बनें। विदेशी कैंपस हमें क्षेत्रीय बिज़नेस संदर्भ को समझने, नए केस स्टडी तैयार करने और वैश्विक नेतृत्व विकसित करने में मदद करता है।

नई शिक्षा नीति के तहत भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों की एंट्री को आप कैसे देखते हैं?

– मैं इसका स्वागत करता हूँ। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए मौजूदा शिक्षा क्षमता पर्याप्त नहीं है। कई छात्र विदेश जाते हैं, जबकि अगर वही गुणवत्ता वाली शिक्षा भारत में मिले तो लागत भी कम होगी और विदेशी मुद्रा भी देश में रहेगी। लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि उनकी गुणवत्ता मूल कैंपस के बराबर हो। अगर गुणवत्ता बनी रहती है, तो विदेशी विश्वविद्यालय सभी के लिए फायदेमंद हैं।

 

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Management education needs to change rapidly: IIMA Director Prof. Bharat Bhaskar

एडइनबॉक्स टीम

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