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How did the Al-Falah controversy expose the layers of the university accreditation system?

शिक्षा को रटने की बजाय तर्क और समझ की ओर बढ़ना होगा- प्रो. के.जी. सुरेश   

Education must move from rote learning to logic and understanding - Prof. K.G. Suresh

इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश से एडइनबॉक्स की ख़ास बातचीत

प्रो. के.जी. सुरेश वर्तमान में नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। देश के इस प्रमुख सांस्कृतिक और बौद्धिक केंद्र का नेतृत्व करने के साथ ही वे निरंतर शासन, मीडिया साक्षरता, शिक्षा सुधार और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण विमर्श को दिशा देते रहे हैं। इस संवाद के माध्यम से एडइनबॉक्स (EdInbox) की तरफ से निबेदिता सेन ने प्रो. के.जी. सुरेश से उनके शिक्षा के भविष्य को लेकर दृष्टिकोण, आलोचनात्मक सोच विकसित करने में संस्थानों की भूमिका और भारत की बौद्धिक विरासत कैसे वैश्विक शिक्षा ढाँचे को समृद्ध कर सकती है— इन सभी पहलुओं को समझने का प्रयास किया। प्रस्तुत है बातचीत के अंश:

प्रश्न: आप दशकों से भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को देख रहे हैं। इसकी मौजूदा स्थिति को आप कैसे देखते हैं?

– भारत की शिक्षा व्यवस्था इस समय एक अहम मोड़ पर है। एक ओर विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और नामांकन की संख्या तेजी से बढ़ी है। दूसरी ओर गुणवत्ता, प्रासंगिकता और वहनीयता जैसी चुनौतियाँ आज भी बनी हुई हैं। हम सूचना आधारित शिक्षा से प्रयोग आधारित शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन यह बदलाव उद्योग और समाज की अपेक्षा के मुकाबले धीमा है।

प्रश्न: आज की शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को क्यों जरूरी माना जा रहा है?

– काफी समय से हमारी शिक्षा अपनी जड़ों से कटती जा रही थी। भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण, समाज, नैतिकता, गणित, आयुर्वेद, भाषा विज्ञान और सतत विकास जैसी शाखाओं का समग्र दृष्टिकोण है। IKS को शामिल करना अतीत में लौटना नहीं, बल्कि उस ज्ञान को पुनः अपनाना है जो आज के वैश्विक संकटों—जैसे जलवायु परिवर्तन, मानसिक स्वास्थ्य और सतत जीवन—के लिए बेहद प्रासंगिक है।

प्रश्न: IKS को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा में कैसे जोड़ा जा सकता है?

– इसे केवल पाठ्यक्रम के एक औपचारिक अध्याय तक सीमित नहीं करना चाहिए। IKS को विभिन्न विषयों में एकीकृत रूप से पढ़ाया जाना चाहिए। जैसे—पर्यावरण अध्ययन में पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों का अध्ययन, प्रबंधन शिक्षा में प्राचीन शासन मॉडल, और पत्रकारिता में स्वदेशी संचार परंपराओं की समझ। इससे ऐसे विद्यार्थी तैयार होंगे जो वैश्विक ढांचे और स्थानीय वास्तविकताओं—दोनों को समझते हों।

प्रश्न: ग्रेजुएट छात्रों में “एम्प्लॉयबिलिटी गैप” को लेकर अक्सर चर्चा होती है। इसका असली कारण क्या है?

– समस्या यह है कि आज भी पाठ्यक्रम में सिद्धांत ज्यादा और व्यवहारिक प्रशिक्षण बहुत कम है। छात्रों को वास्तविक समस्याओं को हल करने वाले अनुभव नहीं मिलते। शिक्षा को रटने की बजाय तर्क और समझ की ओर बढ़ना होगा। इंटर्नशिप, फील्डवर्क और बहुविषयक एक्सपोज़र को शिक्षा का मुख्य हिस्सा बनाना चाहिए, न कि औपचारिकता।

प्रश्न: डिजिटल युग में मीडिया शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है?

– आज के समय में, जब सूचना का अत्यधिक प्रवाह और गलत जानकारी दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं, मीडिया शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। पत्रकारिता संस्थानों को रिपोर्टिंग और एडिटिंग के साथ-साथ डिजिटल एथिक्स, डेटा साक्षरता, फैक्ट-चेकिंग और मीडिया कानून भी सिखाना चाहिए। मीडिया केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी है—यह बात छात्रों को समझानी होगी।

प्रश्न: पत्रकारिता और जनसंचार संस्थानों में किन बदलावों की आवश्यकता है?

– संस्थानों को पुराने पाठ्यक्रमों से आगे बढ़ना होगा। AI, डेटा एनालिटिक्स, मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग, मोबाइल जर्नलिज्म और कम्युनिटी रिपोर्टिंग जैसे विषय पाठ्यक्रम का हिस्सा होने चाहिए। साथ ही, पत्रकारिता के मूल मूल्य—सत्य, निष्पक्षता और जवाबदेही—की रक्षा भी ज़रूरी है। तकनीक पत्रकारिता को सशक्त बनाए, इसे कमजोर नहीं करे।

प्रश्न: उच्च शिक्षा के पुनर्गठन में NEP 2020 की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

– राष्ट्रीय शिक्षा नीति बेहद दूरदर्शी है। इसका लचीलापन, बहुविषयक सीखने और क्षेत्रीय भाषाओं पर जोर देना काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन किसी भी नीति की सफलता उसके लागू होने पर निर्भर करती है। विश्वविद्यालयों को इसे समझकर लागू करने की स्वतंत्रता और प्रशिक्षण दोनों की आवश्यकता है ताकि यह केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए।

प्रश्न: अंत में, आप युवा शिक्षकों और छात्रों को क्या सलाह देना चाहेंगे?

– शिक्षकों के लिए संदेश है—हमेशा सीखते रहें। और छात्रों के लिए—डिग्री के पीछे नहीं, बल्कि उद्देश्य के पीछे दौड़ें। शिक्षा आपको समाज के लिए उपयोगी बनाए, सिर्फ नौकरी के लिए योग्य नहीं।

 

एडइनबॉक्स टीम

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