
Find Your True North की संस्थापक, शिक्षिका और करियर कोच पूजा खन्ना से विशेष बातचीत
युवा करियर फैसलों में अक्सर तुलना, दबाव और अनिश्चितता के बीच उलझ जाते हैं। ऐसे माहौल में सही दिशा चुनने के लिए विश्वसनीय और अनुभव आधारित मार्गदर्शन बेहद ज़रूरी है। इसी उद्देश्य से Find Your True North की संस्थापक, शिक्षिका और करियर कोच पूजा खन्ना से विशेष बातचीत की गई। दो दशकों के अनुभव के साथ वे शिक्षा, एम्प्लॉयबिलिटी और वेल-बिइंग के संगम पर काम करती हैं और छात्रों को आत्म-जागरूकता, स्पष्टता और उद्देश्यपूर्ण करियर पथ चुनने में मदद करती हैं। यह इंटरव्यू छात्रों को करियर और शिक्षा विकल्पों को समझदारी, दीर्घकालिक दृष्टि और आत्मविश्वास के साथ चुनने में मार्गदर्शन देने के लिए है।
प्रश्न 1: करियर चुनते समय छात्र सबसे आम गलती क्या करते हैं, और यह इतनी बार क्यों होती है?
– सबसे आम गलती है—दिखाई देने वाले विकल्पों को योग्य समझ लेना। छात्र अक्सर उन करियर की ओर भागते हैं जो लोकप्रिय हैं, ज्यादा चर्चा में हैं, ज्यादा कमाने वाले हैं या समाज में प्रतिष्ठित माने जाते हैं, बजाय इसके कि वे अपने व्यक्तित्व, रुचि और मूल्यों के अनुरूप रास्ता चुनें। यह इसलिए होता है क्योंकि बच्चे तुलना, मार्क्स, रैंकिंग, सोशल मीडिया की सफलता कहानियों और पैरेंट्स की चिंता वाले माहौल में बड़े होते हैं। OECD और वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की रिपोर्ट्स बताती हैं कि आज के युवा एक बेहद अस्थिर और अनिश्चित दुनिया में करियर चुन रहे हैं, जबकि उनके फैसले लेने के टूल उतनी तेज़ी से विकसित नहीं हुए हैं। जब फैसले डर के आधार पर लिए जाते हैं—पीछे रह जाने का डर, माता-पिता को निराश करने का डर, ‘औसत’ समझे जाने का डर—तो स्पष्टता की जगह दबाव ले लेता है।
प्रश्न 2: माता-पिता की उम्मीदों और सामाजिक दबाव के बीच छात्र अपनी वास्तविक रुचियां और क्षमताएं कैसे पहचानें?
– आत्म-जागरूकता एक दिन में नहीं बनती, यह अनुभव और आत्म-चिंतन से विकसित होती है। Find Your True North में हम छात्रों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे:
कमिटमेंट से पहले एक्सप्लोर करें: इंटर्नशिप, शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट्स, वॉलंटियरिंग, प्रोफेशनल्स को शैडो करना, और इंफॉर्मेशनल इंटरव्यूज़।
खुद को बोर होने दें: जब दिमाग लगातार सोशल मीडिया से भरा न हो, तभी जिज्ञासा जन्म लेती है।
ऊर्जा को देखें, सिर्फ प्रदर्शन को नहीं: खुद से पूछें—कौन-सा काम मुझे लगन से करने पर भी अच्छा महसूस कराता है?
वैश्विक शोध मॉडल बताते हैं कि करियर एक्सप्लोरेशन एक प्रक्रिया है, कोई एक बार का फैसला नहीं। रुचियां अनुभवों से स्पष्ट होती हैं, अनुमान से नहीं।
प्रश्न 3: आपके अनुभव में, क्या अकादमिक मार्क्स किसी छात्र के दीर्घकालिक करियर को तय करते हैं?
– मार्क्स महत्वपूर्ण हैं, पर समय के साथ उनकी अहमियत कम हो जाती है। अच्छे अंक पहली दहलीज़ खोल सकते हैं, लेकिन सफलता कौशल, अनुकूलन क्षमता, सीखने की गति और मूल्यों पर निर्भर करती है। शोध लगातार बताता है कि क्रिटिकल थिंकिंग, सहयोग और रेज़िलिएंस जैसे कौशल भविष्य के लिए बेहद जरूरी हैं।
मैं हमेशा छात्रों से कहती हूं, “मार्क्स आपकी कहानी का एक हिस्सा हैं, पूरी कहानी नहीं।” लंबी दौड़ में सफलता इस बात पर निर्भर है कि आप कितनी तेजी से सीख सकते हैं, भूल सकते हैं और खुद को दोबारा गढ़ सकते हैं।
प्रश्न 4: किस उम्र से छात्रों को गंभीरता से करियर के बारे में सोचना शुरू कर देना चाहिए?
– करियर सोचना जल्दी शुरू होना चाहिए, लेकिन करियर तय नहीं।
12–14 वर्ष: स्वयं को समझने पर ध्यान—रुचि, मूल्य, व्यक्तित्व, जिज्ञासा।
15–17 वर्ष: एक्सपोज़र—विषय, इंडस्ट्री, रोल मॉडल, वास्तविक दुनिया का काम।
स्कूल के बाद: कौशल विकसित करना, प्रयोग करना, अनुभव लेना।
वैश्विक करियर फ्रेमवर्क—National Career Services और APCDA सहित—करियर तैयारी पर जोर देते हैं, करियर निश्चितता पर नहीं। लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि “मैं हमेशा क्या बनूंगा”, बल्कि यह कि “अगला कदम मैं क्या एक्सप्लोर करना चाहता हूं।”
प्रश्न 5: आज के छात्र ‘गलत करियर चुन लेने’ से डरते हैं। वे करियर फैसले आत्मविश्वास से कैसे लें?
– छात्रों को फिक्स्ड माइंडसेट से ‘नेविगेशन माइंडसेट’ की ओर बढ़ना चाहिए। एक ही ‘सही’ विकल्प नहीं होता—सिर्फ समझदारी से लिया गया अगला कदम होता है।
कुछ मददगार तरीके:
– बड़े फैसलों को छोटे-छोटे प्रयोगों में बदलें
– “If… but…” की जगह “Yes, and…” सोचें
जैसे: “हाँ, मुझे सुरक्षा चाहिए और मैं अर्थपूर्ण काम भी करना चाहता हूँ।”
– ऐसे कौशल सीखें जो विभिन्न भूमिकाओं में काम आएं
करियर में आत्मविश्वास तब आता है जब छात्र समझते हैं कि करियर चुना नहीं जाता—करियर बनाया जाता है।
प्रश्न 6: माता-पिता को करियर फैसलों में क्या भूमिका निभानी चाहिए, और किस जगह छात्रों को आगे आने देना चाहिए?
– माता-पिता को फैसला करने वाले नहीं, बल्कि फैसला सक्षम बनाने वाले बनना चाहिए।
उनकी भूमिका है:
– एक्सपोज़र और दृष्टिकोण देना
– अनुभव साझा करना, लेकिन परिणाम थोपना नहीं
– सिर्फ नतीजों को नहीं, कोशिश को भी सराहना
छात्रों को अपनी रुचियों, सीखने की पसंद और आकांक्षाओं में नेतृत्व करना चाहिए। जब संवाद सम्मानजनक और तथ्यों पर आधारित होता है, तो सबसे स्वस्थ परिणाम निकलते हैं।
प्रश्न 7: तेजी से बदलते समय में छात्र डिग्री, कौशल और प्रैक्टिकल एक्सपोज़र का संतुलन कैसे बनाएँ?
– करियर को एक तीन टांगों वाली स्टूल की तरह समझें:
डिग्री: बुनियादी ज्ञान और विश्वसनीयता
कौशल: रोजगार क्षमता और अनुकूलन
व्यावहारिक अनुभव: स्पष्टता और आत्मविश्वास
OECD, APCDA और WEF जैसी वैश्विक संस्थाओं के अनुसार, रोजगार क्षमता अब सिर्फ डिग्री पर निर्भर नहीं है। करियर अब एक सीढ़ी नहीं—कौशलों का जाल है, जो समय के साथ बढ़ता है।
जो छात्र पढ़ाई के साथ प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, रिसर्च, फ्रीलांसिंग और वास्तविक अनुभव जोड़ते हैं, वे भविष्य की अनिश्चितताओं का सामना बेहतर तरीके से करते हैं।
प्रश्न 8: उन छात्रों को आप क्या सलाह देना चाहेंगी जो अपने भविष्य को लेकर भ्रमित हैं या खुद को औसत मानते हैं?
– आप पीछे नहीं हैं, आप बन रहे हैं। भ्रम कमजोरी नहीं है, यह अक्सर आत्म-खोज की शुरुआत होती है। अनुभव बनाइए, समझदारी वाला साथ चुनिए, ऐसे लोगों को फॉलो कीजिए जो प्रेरित करें, सिर्फ प्रभावित नहीं। और याद रखें: खुशी सफलता के बाद मिलने वाली चीज़ नहीं—बल्कि अर्थपूर्ण अनुभवों से बनने वाली भावना है। आपका करियर किसी और जैसा दिखने की ज़रूरत नहीं। उसे आपके लिए मायने रखना चाहिए।




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