
दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित दिल्ली यूनिवर्सिटी के 12 कॉलेजों को 2024–2025 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के लिए अनुदान सहायता अब तक जारी न किये जाने के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ( डूटा ) के आह्वान पर आज सैकड़ों शिक्षकों ने सड़क पर उतारकर कुलपति कार्यालय से दिल्ली विधानसभा तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान दिल्ली सरकार की शिक्षा मंत्री आतिशी के खिलाफ भी जमकर नारे लगाए गए। मंत्री के उस आरोप को निराधार बताया गया जिसमें उन्होंने इन कॉलेजों में वित्तीय अनियमितता की बात कही थी।
शिक्षकों को संबोधित करते हुए पूर्व डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार भागी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली सरकार अब इन कॉलेजों को पूरी तरह से वित्तपोषित करने की अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। ऐसा लगता है कि दिल्ली सरकार सुश्री आतिशी के पत्रों के अनुसार अपनी स्थिति को दोहरा रही है, जिसमें कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024- -25 के लिए अनुदान सहायता जारी नहीं की जाएगी। उन्होंने दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों को अंबेडकर विश्वविद्यालय जैसे राज्य विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करने की चाल से भी शिक्षकों को आगाह किया।
यहाँ उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों वित्त मंत्री आतिशी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के 12 कॉलेजों में अब तक स्पेशल ऑडिट शुरू न करने पर प्रधान सचिव वित्त को एक नोट लिखकर कड़ी फटकार लगाई थी। इन कॉलेजों में वित्तीय अनियमितताएं पता चलने की बात कहते हुए ही पहले कई महीनों सरकार ने इनका फण्ड रोक रखा था। अंततः बीते फ़रवरी महीने में दिल्ली सरकार ने फण्ड जारी किया। लेकिन अब इन कॉलेज के शिक्षक नए वर्ष की पहली तिमाही के अनुदान जारी करने की मांग कर रहे हैं।
आज विरोध मार्च के दौरान प्रोफेसर भागी ने अपने संबोधन में शिक्षकों को यह भी बताया कि दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री ने दावा किया है कि इन कॉलेजों में 939 अस्वीकृत शिक्षण पद हैं। इस पत्र के अनुसार कार्यरत स्थायी और तदर्थ शिक्षकों को अवैध रूप से नियुक्त किया गया है। प्रोफेसर भागी ने कहा कि इन कॉलेजों के एडहॉक शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कई वर्षों तक इन कॉलेजों में पढ़ाया है और अब सुश्री आतिशी द्वारा उनकी नियुक्तियों और पदों को अवैध घोषित करना उन्हें स्वीकार्य नहीं है। दिल्ली सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए डीयू के शिक्षकों ने केजरीवाल सरकार से तुरंत अनुदान जारी करने की मांग की और कहा कि वह तुरंत पूरा अनुदान, स्वीकृत शिक्षण पद जारी करे और स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू करे।




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