
मुंबई में चेंबूर स्थित आचार्य मराठे कॉलेज के उच्च कक्षाओं में छात्राओं के हिजाब और बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाने के ताज़ा आदेश से विवाद पैदा हो गया है। कई मुस्लिम छात्रों ने भेदभाव और धार्मिक असहिष्णुता का आरोप लगाते हुए इसके विरोध में राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करा दी है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते अगस्त माह में भी कॉलेज ने जूनियर छात्रों (कक्षा 11 और 12) के लिए एक समान यूनिफॉर्म पॉलिसी लागू की थी, जिसका भारी विरोध हुआ था और बाद में नियमों में ढील दी गई थी। अब डिग्री छात्रों के लिए भी परिधान को लेकर यह नीति लागू कर दी गयी है।
बता दें कि हाल ही में कॉलेज ने उच्च कक्षाओं (डिग्री अनुभाग) के लिए एक ड्रेस कोड निर्धारित किया है, जिसमें “खुलेपन” वाले और “धर्म आधारित” परिधानों पर प्रतिबन्ध लगाने की बात कही गयी है। इस निर्देश में पारंपरिक रूप से मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले हिजाब, नकाब और बुर्का का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
नए निर्देश में छात्रों को “औपचारिक” और “सभ्य” पोशाक पहनने का निर्देश दिया गया है, और इस विशेष निर्देश के दायरे में पुरुष और महिला दोनों छात्रों को शामिल किया गया है। जहां कॉलेज प्रबंधन ने एक समान ड्रेस कोड की आवश्यकता पर जोर दिया है, मुस्लिम छात्रों ने इसे अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिकता का “उल्लंघन” बताया है। यही वजह है कि इस कदम का विरोध करते हुए 30 छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज प्रशासन के समक्ष औपचारिक तौर पर याचिका पेश कर इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। हालाँकि, कॉलेज प्रिंसिपल ने उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
प्रिंसिपल के साथ छात्रों की बैठक में मौजूद रहे अतीक अहमद खान कहते हैं, “जब हमने उनसे कहा कि मुस्लिम माता-पिता लड़कियों को हिजाब के बिना पढ़ने की इजाजत नहीं दे सकते हैं, तो कॉलेज प्रशासन ने कहा कि अगर हिजाब शिक्षा में बाधा है, तो उन्हें इसे हटा देना चाहिए। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की कि कॉलेज एक विशेष ड्रेस कोड लागू नहीं कर सकता क्योंकि नैतिकता की धारणा हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है।” वहीं कॉलेज की प्रिंसिपल विद्यागौरी लेले से जब इस मसले पर टिपण्णी मांगी गयी तो इस पर टिप्पणी करने में अपनी असमर्थता जताई।




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