
दिल्ली दंगा मामले में साजिश की आरोपों का सामना कर रहे जेएनयू के पीएचडी स्कॉलर और स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद को आज फिर रहत नहीं मिली। दिल्ली की एक निचली अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेयी ने 13 मई को दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था।
बता दें कि परिस्थितियों में बदलाव का हवाला देते हुए 14 फरवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी जमानत याचिका वापस लेने के बाद उमर खालिद ने ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उमर खालिद पर आतंकवाद विरोधी कानून ‘गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधियनियम यानी यूएपीए के तहत आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले कड़कडूमा कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी ज़मानत ख़ारिज कर दी थी। फिर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ज़मानत की याचिका डाली।
फरवरी में उमर ख़ालिद ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी ज़मानत याचिका ये कहते हुए वापस ले ली थी कि वे ट्रायल कोर्ट जाएंगे। दिल्ली की निचली अदालत के आज के फ़ैसले के साथ ही ये दूसरी बार है जब ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
गौरतलब है कि उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में है। निचली अदालत ने सबसे पहले मार्च 2022 में खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था।




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