
हाल ही में पूर्व भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) ने सोशल मीडिया पर स्टोर किए गए ब्रेस्ट मिल्क पैकेट्स की तस्वीरें साझा कीं। शुरुआत में कई लोगों ने इसे मातृत्व से जुड़ा एक व्यक्तिगत अनुभव माना, लेकिन जल्द ही यह पोस्ट एक बड़े स्वास्थ्य जागरूकता विषय का हिस्सा बन गई।
ज्वाला गुट्टा और उनके पति अभिनेता विष्णु विशाल ने अप्रैल 2025 में अपनी बेटी का स्वागत किया था। प्रसव के बाद के एक वर्ष के अनुभव साझा करते हुए ज्वाला गुट्टा ने बताया कि उन्होंने अन्य माताओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से ब्रेस्ट मिल्क डोनेट किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दो तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “मैंने पोस्टपार्टम के पहले वर्ष के दौरान हैदराबाद और चेन्नई के सरकारी अस्पतालों में लगभग 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क डोनेट किया।”
यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई। इसकी वजह केवल दूध दान नहीं था, बल्कि इसने भारत में कम चर्चा होने वाले एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषय — ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन और समय से पहले जन्मे बच्चों की देखभाल — को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
NICU में भर्ती बच्चों के लिए क्यों जरूरी है डोनर ब्रेस्ट मिल्क?
अपने पोस्ट में ज्वाला गुट्टा ने बताया कि डोनर ह्यूमन मिल्क उन बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है जो Neonatal Intensive Care Unit (NICU) में भर्ती होते हैं, खासकर समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए।
कई बार समय से पहले डिलीवरी, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं, मां की मेडिकल स्थिति या प्रसव के बाद दूध बनने में देरी जैसी वजहों से नवजात को तुरंत मां का दूध नहीं मिल पाता। ऐसे में डोनर मिल्क इन बच्चों के लिए पोषण और इम्यूनिटी का महत्वपूर्ण सहारा बनता है।
ज्वाला गुट्टा ने लिखा, “सिर्फ 100 मिलीलीटर डोनर मिल्क एक 1 किलो के छोटे बच्चे को कई दिनों तक पोषण दे सकता है।”
उनकी यह बात सोशल मीडिया पर काफी लोगों को प्रभावित करती नजर आई, क्योंकि इससे जटिल मेडिकल विषय को आम भाषा में समझना आसान हो गया।
ह्यूमन मिल्क बैंक्स का मेडिकल महत्व
डोनर ब्रेस्ट मिल्क के महत्व को कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाएं भी मान्यता देती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization (WHO) के अनुसार, जिन कम वजन वाले नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता, उन्हें सुरक्षित मिल्क बैंकिंग (Milk Banking) सुविधा उपलब्ध होने पर डोनर ह्यूमन मिल्क दिया जाना चाहिए।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार डोनर ब्रेस्ट मिल्क:
– बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत करता है
– पाचन में मदद करता है
– संक्रमण का खतरा कम करता है
– नवजात के विकास को बेहतर बनाता है
ज्वाला गुट्टा ने अपने पोस्ट में Necrotising Enterocolitis का भी जिक्र किया। यह समय से पहले जन्मे बच्चों में होने वाली एक गंभीर आंत संबंधी बीमारी है। रिसर्च बताती है कि डोनर ह्यूमन मिल्क इस जानलेवा स्थिति के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार हर साल दुनियाभर में 2 करोड़ से अधिक कम वजन वाले बच्चों का जन्म होता है, जिनमें बड़ी संख्या विकासशील देशों की होती है।
भारत में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को लेकर जागरूकता अब भी सीमित
मेडिकल महत्व होने के बावजूद भारत में ह्यूमन मिल्क बैंक्स (Human Milk Banks) और ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को लेकर जागरूकता अभी भी काफी सीमित है।
कई परिवार यह नहीं जानते कि ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन:
– मेडिकल स्क्रीनिंग के बाद किया जाता है
– सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होता है
– रेगुलेटेड मिल्क बैंकों द्वारा संभाला जाता है
– सीधे तौर पर अस्पतालों में भर्ती नवजात बच्चों की मदद करता है
भारत में मातृ स्वास्थ्य को लेकर सार्वजनिक चर्चा अधिकतर गर्भावस्था और प्रसव तक सीमित रहती है। वहीं पोस्टपार्टम रिकवरी, नवजात पोषण और मिल्क डोनेशन जैसे विषयों पर अपेक्षाकृत कम बात होती है। यही वजह रही कि ज्वाला गुट्टा की पोस्ट ने लोगों का ध्यान तेजी से आकर्षित किया।
एक साधारण पोस्ट जिसने बढ़ाई जागरूकता
सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें किसी प्रचार अभियान जैसी नहीं लग रही थीं। उनमें अस्पतालों में दान के लिए व्यवस्थित तरीके से रखे गए ब्रेस्ट मिल्क पैकेट्स दिखाई दे रहे थे।
इसी सादगी ने इस संदेश को और प्रभावशाली बना दिया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से कहते आए हैं कि जागरूकता NICU सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाती है। एक डोनर कई नवजात बच्चों की मदद कर सकता है, खासकर जीवन के शुरुआती बेहद संवेदनशील दिनों में।
ज्वाला गुट्टा ने खुलकर इस प्रक्रिया पर बात करके अन्य माताओं को भी अपने आसपास के सरकारी अस्पतालों और Breast Milk Donation Programmes के बारे में जानकारी लेने के लिए प्रेरित किया।
मातृ स्वास्थ्य और नवजात देखभाल पर बढ़ी चर्चा
यह चर्चा अब केवल खेल या सेलिब्रिटी दुनिया तक सीमित नहीं रही। इसके जरिए मातृ स्वास्थ्य, नवजात पोषण, नर्सिंग सपोर्ट सिस्टम, NICU जागरूकता और महिलाओं की स्वास्थ्य शिक्षा जैसे विषयों पर भी बातचीत बढ़ी है।
हेल्थकेयर, नर्सिंग, पीडियाट्रिक्स, Neonatal Medicine या Public Health में करियर बनाने की सोच रहे छात्रों के लिए यह उदाहरण दिखाता है कि जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी किस तरह जीवन बचाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं में कई बार सबसे महत्वपूर्ण काम बेहद शांत तरीके से होते हैं — सही जानकारी, संवेदनशीलता और समय पर मदद के जरिए।




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