
आज के दौर में बच्चे अपना बड़ा समय स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, ज्यादातर गतिविधियां अब डिजिटल स्क्रीन के जरिए ही हो रही हैं। लेकिन इसके साथ इंटरनेट पर मौजूद हानिकारक कंटेंट, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर इसके असर को देखते हुए मलेशिया ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है।
मलेशिया सरकार ने 1 जून से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का उद्देश्य सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों तक पहुंचने वाले हानिकारक कंटेंट को रोकना और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित बनाना है।
ऑनलाइन कंपनियों को बदलनी होगी अपनी व्यवस्था
मलेशियन कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन (MCMC) ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा है कि अब ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं और सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव करने होंगे।
नियमों के तहत कंपनियों को ऐसे सुरक्षा फीचर्स लागू करने होंगे जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट रजिस्ट्रेशन और उपयोग को नियंत्रित कर सकें। इसके अलावा प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए उम्र के हिसाब से सुरक्षित डिजिटल अनुभव देना भी जरूरी होगा।
सरकार का मानना है कि केवल कंटेंट हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों तक जोखिम भरे फीचर्स और सामग्री की पहुंच को पहले से रोकना भी जरूरी है।
साइबरबुलिंग और हानिकारक कंटेंट पर सख्ती
नए नियमों में हाई-रिस्क फीचर्स पर अतिरिक्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट की पहचान कर तुरंत कार्रवाई करनी होगी जो बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसमें साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, फर्जी जानकारी, नस्लीय या धार्मिक नफरत फैलाने वाली पोस्ट और हिंसक सामग्री शामिल हैं। सरकार ने प्लेटफॉर्म्स को यह भी निर्देश दिया है कि संदिग्ध कंटेंट को तेजी से हटाने और रिपोर्टिंग सिस्टम को मजबूत बनाने की व्यवस्था की जाए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू होंगे नए फीचर्स
नए डिजिटल नियमों के तहत कंपनियों को कई नए सुरक्षा फीचर्स लागू करने होंगे। इसमें प्रभावी शिकायत प्रणाली, तेज प्रतिक्रिया तंत्र और विज्ञापनदाताओं की पहचान सत्यापित करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इसके अलावा अगर किसी कंटेंट में AI या एडिटेड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे स्पष्ट रूप से लेबल करना भी जरूरी हो सकता है। सरकार का मानना है कि इससे लोगों को असली और बदले हुए कंटेंट के बीच फर्क समझने में मदद मिलेगी।
जल्द लागू हो सकता है एज वेरिफिकेशन सिस्टम
मलेशिया सरकार जल्द ही एज वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी भी कर रही है। इसके जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स यूजर्स की उम्र की पुष्टि कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम उम्र के बच्चों तक ऐसा कंटेंट न पहुंचे जो उनकी उम्र के लिए उपयुक्त नहीं है। हालांकि डिजिटल अधिकारों से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एज वेरिफिकेशन लागू करते समय यूजर्स की प्राइवेसी का भी ध्यान रखना होगा।
कई देशों में बढ़ रही डिजिटल सुरक्षा को लेकर सख्ती
मलेशिया ऐसा कदम उठाने वाला पहला देश नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देशों ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। बढ़ती स्क्रीन टाइम आदतों और सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए अब सरकारें टेक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में और भी देश इसी तरह के डिजिटल सुरक्षा कानून ला सकते हैं। खासतौर पर बच्चों और किशोरों को इंटरनेट के खतरों से बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर नए नियमों की मांग लगातार बढ़ रही है।
कंपनियों को दिया गया समय
MCMC ने कहा है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को नए नियम लागू करने के लिए कुछ समय दिया जाएगा। हालांकि आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह ग्रेस पीरियड कितने समय का होगा।
सरकार का कहना है कि उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि ऐसा डिजिटल माहौल बनाना है जहां बच्चे सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का उपयोग कर सकें।




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