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Message from the AISHE 2023-24 report: With rising enrollment, the focus must now shift to quality

AISHE 2023-24 रिपोर्ट का संदेश: बढ़ते दाखिले के साथ अब गुणवत्ता पर भी हो फोकस

Message from the AISHE 2023-24 report: With rising enrollment, the focus must now shift to quality

भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र की तस्वीर पिछले एक दशक में तेजी से बदली है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 की रिपोर्ट इस बदलाव की पुष्टि करती है। कुल नामांकन का 4.50 करोड़ तक पहुंचना, छात्राओं की बढ़ती भागीदारी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि तथा विज्ञान और तकनीकी शिक्षा में बढ़ती रुचि यह बताती है कि देश में उच्च शिक्षा पहले की तुलना में अधिक सुलभ और समावेशी हुई है। यह उपलब्धि निश्चित रूप से उत्साहजनक है, लेकिन यह केवल आधी तस्वीर है। असली चुनौती अब इस बढ़ती संख्या को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसरों में बदलने की है।

पिछले दस वर्षों में उच्च शिक्षा में 31.5 प्रतिशत की वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। खासकर छात्राओं का नामांकन 42 प्रतिशत से अधिक बढ़ना और जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) का लगातार 1.0 से ऊपर रहना दर्शाता है कि परिवारों की सोच बदल रही है। लड़कियां अब केवल स्कूल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। यह बदलाव भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सकारात्मक पहलू यह भी है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। लंबे समय तक उच्च शिक्षा से दूर रहे समुदायों का विश्वविद्यालयों तक पहुंचना सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम है। लेकिन केवल प्रवेश दिला देना पर्याप्त नहीं होगा। इन विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, आर्थिक सहायता, कौशल विकास, शोध के अवसर और बेहतर प्लेसमेंट की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बढ़ता नामांकन केवल सांख्यिकीय उपलब्धि बनकर रह जाएगा।

रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण संकेत STEM यानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र से जुड़ा है। इन विषयों में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी भारत के तकनीकी भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में यदि अधिक छात्र और विशेषकर छात्राएं इन क्षेत्रों में आगे बढ़ती हैं, तो भारत की ज्ञान अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

हालांकि, AISHE रिपोर्ट उन चुनौतियों की ओर भी अप्रत्यक्ष रूप से ध्यान दिलाती है, जिन पर अब गंभीरता से काम करने की जरूरत है। आज भी देश के अनेक कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली हैं, कई संस्थानों में आधुनिक प्रयोगशालाओं और डिजिटल संसाधनों का अभाव है, जबकि शोध और नवाचार का स्तर वैश्विक मानकों से काफी पीछे है। कई विश्वविद्यालयों में उद्योगों के साथ सहयोग सीमित है, जिसके कारण डिग्री और रोजगार के बीच का अंतर बना हुआ है। यदि उच्च शिक्षा का विस्तार गुणवत्ता के बिना होगा, तो इसका लाभ सीमित रह जाएगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) ने बहुविषयक शिक्षा, लचीले पाठ्यक्रम, डिजिटल शिक्षा और कौशल आधारित सीखने की जो दिशा तय की है, अब उसे तेजी से लागू करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि नवाचार, शोध और उद्यमिता के केंद्र बनाना होगा। उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी, इंटर्नशिप, स्टार्टअप संस्कृति और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम समय की मांग हैं।

यह भी ध्यान रखना होगा कि AISHE के आंकड़े संस्थानों द्वारा स्वयं उपलब्ध कराए जाते हैं। इसलिए डेटा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लगातार बेहतर बनाना जरूरी है। विश्वसनीय आंकड़े ही बेहतर नीतियों का आधार बन सकते हैं।

भारत आज दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का आधार भी है। AISHE 2023-24 की रिपोर्ट यह भरोसा दिलाती है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन अब लक्ष्य केवल अधिक छात्रों को कॉलेज तक पहुंचाना नहीं होना चाहिए। असली सफलता तब होगी, जब हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, शोध के अवसर और सम्मानजनक रोजगार मिलेगा।

उच्च शिक्षा की असली परीक्षा अब प्रवेश संख्या से आगे बढ़कर गुणवत्ता, समान अवसर और रोजगार क्षमता पर होगी। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि भारत केवल सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली वाला देश बनता है या दुनिया की सबसे सक्षम ज्ञान अर्थव्यवस्था भी।

 

 

 

रईस अहमद 'लाली'

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