Edinbox Hindi

बंद होते इंजीनियरिंग कॉलेज: संकट सिर्फ संस्थानों का नहीं, पूरी तकनीकी शिक्षा व्यवस्था का है

देशभर में 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों तथा 950 से अधिक तकनीकी पाठ्यक्रमों को बंद करने का अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) का फैसला पहली नजर में एक प्रशासनिक कदम लग सकता है। लेकिन यदि इसकी परतें खोली जाएं, तो यह भारत की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़े गहरे संकट की कहानी कहता है। यह सवाल सिर्फ इतने भर का नहीं है कि कुछ कॉलेज बंद हो गए, बल्कि यह है कि आखिर ऐसे हालात पैदा क्यों हुए कि संस्थानों के दरवाजे ही बंद करने पड़े।

एक समय था जब इंजीनियरिंग की डिग्री सफलता की गारंटी मानी जाती थी। देशभर में बड़ी संख्या में निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खुले। हर छोटे-बड़े शहर में नए संस्थान बने और हजारों सीटें तैयार कर दी गईं। उम्मीद थी कि उद्योगों की बढ़ती मांग के साथ इन कॉलेजों से निकलने वाले इंजीनियर देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगे। लेकिन समय के साथ तस्वीर बदल गई। कई कॉलेजों में सीटें खाली रहने लगीं, कैंपस प्लेसमेंट कमजोर हो गए और छात्रों का भरोसा भी कम होने लगा।

आज स्थिति यह है कि अनेक इंजीनियरिंग कॉलेज अपनी आधी सीटें भी नहीं भर पा रहे हैं। इसका कारण केवल छात्रों की घटती संख्या नहीं है। असली समस्या शिक्षा की गुणवत्ता, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम का अभाव, प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और कमजोर बुनियादी सुविधाएं हैं। यदि किसी संस्थान से पढ़ने के बाद रोजगार की संभावना ही सीमित हो जाए, तो स्वाभाविक है कि छात्र दूसरे विकल्पों की ओर रुख करेंगे।

AICTE का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक स्पष्ट संदेश जाता है कि केवल इमारत खड़ी कर देने से शिक्षा संस्थान नहीं चल सकते। यदि कॉलेज निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तो ऐसे संस्थानों के अस्तित्व पर सवाल उठना तय है। लंबे समय तक सुधार का अवसर देने के बाद भी यदि स्थिति नहीं बदलती, तो नियामक संस्था के पास सख्त कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

हालांकि इस पूरे मामले का एक सकारात्मक पक्ष भी है। AICTE ने ‘प्रोग्रेसिव क्लोजर’ की नीति अपनाकर पहले से पढ़ रहे छात्रों के हितों की रक्षा की है। नए प्रवेश रोक दिए जाएंगे, लेकिन वर्तमान छात्रों की पढ़ाई पूरी कराई जाएगी और उन्हें डिग्री भी मिलेगी। यह निर्णय छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दृष्टि से संतुलित माना जा सकता है।

लेकिन केवल कॉलेज बंद कर देना समाधान नहीं है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि तकनीकी शिक्षा को दोबारा कैसे मजबूत बनाया जाए। आज उद्योग जगत तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं बन रही हैं। यदि इंजीनियरिंग कॉलेज अभी भी पुराने पाठ्यक्रम और पारंपरिक पढ़ाई के सहारे चलेंगे, तो वे छात्रों और उद्योग दोनों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाएंगे।

सरकार, नियामक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इंजीनियरिंग शिक्षा केवल डिग्री देने तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों को रोजगार योग्य कौशल भी दे। उद्योगों के साथ साझेदारी बढ़े, प्रयोगशालाएं आधुनिक हों, शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण मिले और पाठ्यक्रम समय-समय पर अपडेट किए जाएं। तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल इंजीनियर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नवाचारकर्ता तैयार करना होना चाहिए जो देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति में योगदान दे सकें।

इस पूरे घटनाक्रम से छात्रों और अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सीख निकलती है। किसी भी कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले केवल उसकी फीस, भवन या प्रचार सामग्री देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। यह जांचना जरूरी है कि संस्थान AICTE से मान्यता प्राप्त है या नहीं, वहां पढ़ाई की गुणवत्ता कैसी है, प्लेसमेंट रिकॉर्ड क्या है और उद्योग जगत से उसका जुड़ाव कितना मजबूत है। चार साल का समय और लाखों रुपये निवेश करने से पहले सही जानकारी जुटाना ही समझदारी है।

58 कॉलेजों का बंद होना किसी व्यवस्था की असफलता का उत्सव नहीं, बल्कि उसे सुधारने का अवसर है। यदि इस फैसले से शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होती है, कमजोर संस्थानों की जगह सक्षम संस्थान विकसित होते हैं और छात्रों को बेहतर तकनीकी शिक्षा मिलती है, तो यह कदम भविष्य के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। लेकिन यदि इसे केवल आंकड़ों तक सीमित कर दिया गया, तो कुछ वर्षों बाद यही संकट फिर किसी नए रूप में सामने खड़ा होगा। भारत को इंजीनियरों की संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता की जरूरत है, और अब तकनीकी शिक्षा की पूरी व्यवस्था को इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा।

 

 

 

 

रईस अहमद 'लाली'

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed