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Online Education Trends in India: South India Prefers STEM, Delhi Chooses Management and Computer Science

Online Education Trends: दक्षिण भारत में STEM, दिल्ली में मैनेजमेंट और उत्तर भारत में Soft Skills की बढ़ी मांग

Online Education Trends in India: South India Prefers STEM, Delhi Chooses Management and Computer Science

देश में ऑनलाइन उच्च शिक्षा और स्किल आधारित कोर्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के छात्रों की पसंद एक जैसी नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण भारत के राज्यों में विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM से जुड़े कोर्स की मांग ज्यादा है, जबकि उत्तर भारत के कुछ राज्यों में गैर-तकनीकी विषयों और सॉफ्ट स्किल कोर्स के प्रति छात्रों का रुझान मजबूत है।

इस बदलाव को भारत सरकार के ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म SWAYAM (Study Webs of Active-Learning for Young Aspiring Minds) के जरिए समझा जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय की पहल SWAYAM पर स्कूल स्तर से लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक अलग-अलग विषयों के ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं। इन कोर्स को देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों और राष्ट्रीय समन्वयकों के जरिए तैयार किया जाता है।

दक्षिण भारत में टेक्निकल कोर्स की मजबूत पकड़

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान तकनीकी विषयों को लेकर छात्रों की रुचि ज्यादा दिखाई देती है। खासतौर पर कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और Python जैसे कोर्स युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं।

दिए गए आंकड़ों के अनुसार, तकनीकी कोर्स में तमिलनाडु करीब 11.88 लाख नामांकन के साथ आगे है। इसके बाद आंध्र प्रदेश करीब 7.7 लाख, महाराष्ट्र 5.82 लाख, कर्नाटक 3.97 लाख और तेलंगाना 3.75 लाख नामांकन के साथ प्रमुख राज्यों में शामिल हैं।

STEM से जुड़े कोर्स में भी दक्षिण भारतीय राज्यों का दबदबा दिखाई देता है। कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग से जुड़े नामांकन में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा बताई गई है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का स्थान है। यह रुझान बताता है कि दक्षिण भारत में छात्र ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तकनीकी और रोजगार से जुड़े कौशल हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर कर रहे हैं।

दिल्ली में मैनेजमेंट और कंप्यूटर साइंस पसंद

दिल्ली के छात्रों की ऑनलाइन कोर्स पसंद दक्षिण भारत से कुछ अलग है। यहां मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग जैसे विषय ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। इसका एक कारण राजधानी में मौजूद उच्च शिक्षण संस्थानों, निजी कंपनियों और प्रतियोगी रोजगार बाजार से जुड़ी संभावनाएं भी हो सकती हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में गैर-तकनीकी विषयों और सॉफ्ट स्किल से जुड़े कोर्स में अपेक्षाकृत ज्यादा रुचि दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश इस श्रेणी में प्रमुख राज्यों में शामिल है।

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कुल करीब 5.17 लाख नामांकन हुए, जिनमें लगभग 3.50 लाख पुरुष और 1.67 लाख महिला विद्यार्थी शामिल हैं। हालांकि, इन राज्यवार आंकड़ों के स्रोत और समय-सीमा को अलग से देखना जरूरी है, क्योंकि SWAYAM का लाइव डैशबोर्ड लगातार अपडेट होता रहता है।

SWAYAM पर करीब 6 करोड़ नामांकन

SWAYAM के मौजूदा आधिकारिक डैशबोर्ड पर करीब 5.99 करोड़ छात्र नामांकन और करीब 98.28 लाख परीक्षा पंजीकरण दर्ज हैं। वहीं करीब 1.69 लाख से अधिक कोर्स पूरे हो चुके हैं और लगभग 62.82 लाख सफल प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इसलिए 2025 से अब तक 92.98 लाख नामांकन और 6.6 करोड़ युवाओं द्वारा कोर्स पूरा करने जैसे आंकड़ों को प्रकाशित करते समय उनकी संबंधित अवधि और परिभाषा स्पष्ट करना जरूरी है।

SWAYAM पर कोर्स की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। प्लेटफॉर्म पर इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के अलावा मैनेजमेंट, कॉमर्स, गणित, विज्ञान, स्वास्थ्य, कानून, मानविकी और कला जैसे विषय उपलब्ध हैं। छात्रों को अपनी जरूरत के अनुसार एक से ज्यादा कोर्स में दाखिला लेने की सुविधा भी मिलती है।

ऑनलाइन कोर्स के क्रेडिट डिग्री में जुड़ सकते हैं

SWAYAM की सबसे अहम विशेषताओं में से एक इसका क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम है। UGC के नियमों के तहत विश्वविद्यालय SWAYAM से किए गए मान्य क्रेडिट को छात्र के अकादमिक रिकॉर्ड में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, क्रेडिट ट्रांसफर की प्रक्रिया संबंधित विश्वविद्यालय और उसके नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए छात्रों को किसी भी कोर्स में दाखिला लेने से पहले अपने संस्थान की क्रेडिट ट्रांसफर नीति जरूर देखनी चाहिए।

SWAYAM के कोर्स की परीक्षा के लिए National Testing Agency (NTA) भी जिम्मेदार है। NTA ने 2025 के जुलाई सेमेस्टर के लिए 648 कोर्स की परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया था। परीक्षा कंप्यूटर आधारित और पेन-पेपर दोनों माध्यमों में आयोजित की गई थी।

हालांकि, व्यवस्था में अब कुछ बदलाव भी किए गए हैं। UGC के नए ढांचे के तहत ऐसे विश्वविद्यालय, जिन्होंने SWAYAM के क्रेडिट फ्रेमवर्क को अपनाया है, अपने यहां SWAYAM परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। इसका उद्देश्य छात्रों के लिए ऑनलाइन कोर्स और नियमित डिग्री की पढ़ाई को जोड़ना आसान बनाना है।

रोजगार की जरूरत से जुड़ रही ऑनलाइन पढ़ाई

राज्यों के बीच कोर्स की पसंद में अंतर यह संकेत देता है कि ऑनलाइन शिक्षा अब केवल अतिरिक्त पढ़ाई का माध्यम नहीं रह गई है। छात्र इसे अपने करियर और रोजगार से जुड़े कौशल विकसित करने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

दक्षिण भारत में तकनीकी कोर्स की मजबूत मांग और उत्तर भारत के कई राज्यों में सॉफ्ट स्किल तथा गैर-तकनीकी विषयों की लोकप्रियता इस बात की ओर इशारा करती है कि छात्र अपने क्षेत्र की रोजगार जरूरतों और करियर विकल्पों के हिसाब से ऑनलाइन शिक्षा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऐसे में SWAYAM जैसे प्लेटफॉर्म उच्च शिक्षा में छात्रों को अपनी नियमित पढ़ाई के साथ अतिरिक्त विषय और कौशल सीखने का अवसर देते हैं। आने वाले समय में ऑनलाइन कोर्स और क्रेडिट आधारित पढ़ाई का यह मॉडल उच्च शिक्षा में छात्रों के विकल्पों को और बढ़ा सकता है।

 

Asmita Sarkar

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