
जेएनयू। यानी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय। पिछले कुछ वर्षों से देश का यह प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय सबसे ज़्यादा विवादों में रहा है। खासकर, वर्ष 2014 के बाद से तो अक्सर गलत कारणों से ही यह सुर्ख़ियों में रहा। अब इसी विवादास्पद विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी पर एक फिल्म आयी है। जाहिर तौर पर जब इसे लेकर विवाद पिछले कुछ वर्षों से चले हैं तो फिल्म की समय-अवधि भी 2013 से लेकर 2019 तक की है। इसमें जेएनयू कैंपस से जुड़े विवादों के अलावा छात्र राजनीति और छात्र नेताओं के राजनीतिक द्वंद को दिखाया गया है। ढाई घंटे की यह फिल्म 21 जून को देशभर में रिलीज हुई।
फिल्म की शुरुआत “देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में आपका स्वागत है.. ” से होती है। इस फिल्म का निर्देशन जिला गाजियाबाद फिल्म के निर्देशक व गाजियाबाद निवासी विनय शर्मा ने किया है। वह कहते हैं, इसमें छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में मारे गए अर्द्धसैनिक जवानों की शहादत का जश्न जेएनयू हॉस्टल में मिठाई बांटने, वर्ष 2016 में कैंपस में आतंकी अफजल गुरु की शहादत मनाने और भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाने, महिलाओं के अधिकारियों की रक्षा के लिए सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर बनी जीएस कैश कमेटी में यौन उत्पीड़न के मामले, वर्ष 2015 में छात्रसंघ चुनाव के सेंट्रल पैनल में एबीवीपी को महासचिव सीट मिलने से लेकर, जातिवाद, महिषासुर की पूजा आदि ज्वलंत मुद्दों को उठाया गया है।
फिल्मकार विनय शर्मा बताते हैं कि इसमें वामपंथी संगठनों और छात्र संगठनों द्वारा जातिवाद मुद्दे को भी उठाया है। फिल्म में मुख्य किरदार के रूप में जेएनयू छात्रसंघ 2015 के पूर्व महासचिव व एबीवीपी नेता सौरभ शर्मा को दिखाया गया है। इसके अलावा कन्हैया कुमार से लेकर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष व आइसा की पूर्व सदस्य शेहला राशिद को भी विभिन्न किरदारों में दिखेंगे। फिल्म में कन्हैया कुमार का किरदार किशन कुमार, शेहला राशिद का शायरा के नाम से दिखेगा।
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विनय शर्मा का कहना है कि इसके माध्यम से दर्शकों को एक बार फिर वही भारत माता की जय, जय श्रीराम, देश की एकता, प्रभुता और अखंडता नहीं टूटने देंगे आदि नारे सुनने को मिलेंगे। इसके अलावा फीस बढ़ोतरी पर हॉस्टल में मारपीट, सबसे बड़ी हड़ताल भी दिखेगी। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष व आइसा कार्यकर्ता शेहला राशिद तीन से चार साल पहले तक केंद्र सरकार की सबसे बड़ी आलोचक थी। लेकिन अब वह सरकार के कामकाज की तारीफ करती हैं। हालांकि, फिल्म में शेहला का नकारात्मक रूप ही दर्शकों को दिखाया गया है, जिसपर निर्देशक को अफसोस भी है।




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