
अहमदाबाद में आयोजित ड्रोन एंड स्पेस टेक्नोलॉजी समिट 2026 में इंडस यूनिवर्सिटी की उपाध्यक्ष और वेस्टर्न इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स (WIIA) की निदेशक राधिका भंडारी ने पैनलिस्ट के रूप में हिस्सा लिया। नारायणी हाइट्स में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने “Innovation Without Boundaries: Strengthening Industry–Academia Partnerships for India’s Space Economy” विषय पर आयोजित फायरसाइड चैट में अपने विचार साझा किए।
चर्चा का मुख्य केंद्र भारत की उभरती हुई स्पेस इकोनॉमी को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों, सरकार और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता रहा। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी बेहद जरूरी है।
इंडस यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करते हुए राधिका भंडारी ने विश्वविद्यालय की उस रणनीति को प्रस्तुत किया, जिसके तहत स्पेस और एविएशन शिक्षा के लिए एक मजबूत और आधुनिक शिक्षण इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय बहु-विषयक शिक्षा, उद्योग से जुड़े पाठ्यक्रम, अनुसंधान सहयोग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन के माध्यम से छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इंडस यूनिवर्सिटी और वेस्टर्न इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स (WIIA) उभरते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए छात्रों को एविएशन और एयरोस्पेस शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि भारत के स्पेस सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे अवसरों का लाभ उठाने के लिए युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल और व्यावहारिक अनुभव से लैस करना आवश्यक है।
समिट में शिक्षा जगत और उद्योग क्षेत्र के कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान वक्ताओं ने तेजी से बदल रहे न्यू स्पेस इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और उद्योग-शिक्षा सहयोग की बढ़ती जरूरत पर अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने माना कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है।
इस कार्यक्रम में इंडस यूनिवर्सिटी की सक्रिय भागीदारी ने नवाचार, रणनीतिक साझेदारी और भविष्य-केंद्रित शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। विश्वविद्यालय का लक्ष्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है जो भारत के तेजी से विस्तार कर रहे अंतरिक्ष उद्योग की जरूरतों को पूरा कर सकें और देश की स्पेस इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दें।




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