
भारत जब वैश्विक ज्ञान शक्ति बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब देश की उच्च शिक्षा एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। इस बदलाव को सबसे स्पष्ट रूप से समझाने वाले नामों में से एक हैं डॉ. संकु बोस — सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी (SNU) के वाइस चांसलर और टेक्नो इंडिया के ग्रुप CEO। लाइफ-रेडी एजुकेशन और इंडस्ट्री 5.0 के लिए मानवीय-केंद्रित सीखने पर आधारित उनकी सोच ने उन्हें इस क्षेत्र का एक अग्रणी विचारक बना दिया है।
एडइनबॉक्स (EdInbox) की बातचीत में डॉ. बोस ने बताया कि भारत को अपनी सोच में तुरंत बदलाव क्यों चाहिए, SNU को किस तरह “लाइफ-रेडी टैलेंट फैक्ट्री” के रूप में बदला जा रहा है, और 2035 तक वे भारत के युवाओं के लिए कैसी विरासत छोड़ना चाहते हैं।
1. भारतीय उच्च शिक्षा में सबसे बड़ा जरूरी बदलाव
डॉ. संकु बोस:
“भारत को डिग्री-रेडी एजुकेशन से आगे बढ़कर लाइफ-रेडी एजुकेशन अपनानी होगी। दुनिया भर में विश्वविद्यालय अब सिर्फ सिलेबस, परीक्षाओं या पारंपरिक कक्षाओं से नहीं आंकें जाते, बल्कि इस बात से कि वे छात्रों के जीवन में क्या बदलाव लाते हैं —आत्मविश्वास, रचनात्मकता, रोजगार क्षमता, वैश्विक समझ और मूल्य।”
उन्होंने कहा कि हमें पूछना बंद करना चाहिए — “आपने क्या पढ़ा?” और पूछना शुरू करना चाहिए — “क्या आप लाइफ-रेडी हैं?”
इसके लिए वे C3P फ्रेमवर्क को भारत की शिक्षा का आधार मानते हैं:
Curiosity (जिज्ञासा): सवाल पूछने और खोज करने का साहस
Creativity (रचनात्मकता): कल्पना कर समाधान बनाने की क्षमता
Compassion (दया व संवेदना): नैतिकता, सहानुभूति और मानवता
Purpose (उद्देश्य): क्यों सीखना है और समाज में कैसे योगदान देना है
डॉ. बोस कहते हैं कि यदि भारत इन चार क्षमताओं को उसी गंभीरता से शामिल करे, जैसे डिग्री को दी जाती है, तो हम वैश्विक मानकों को न केवल छू सकते हैं बल्कि उनसे आगे भी जा सकते हैं।
2. शिक्षा को उद्देश्य से जोड़ना, केवल व्यवसाय न बनने देना
डॉ. बोस:
“मेरी प्राथमिक जिम्मेदारी शिक्षा की पवित्रता बनाए रखना है। डिग्री योग्यता देती है, लेकिन उद्देश्य-आधारित शिक्षा प्रभाव पैदा करती है।”
टेक्नो इंडिया और SNU दोनों में हर कार्यक्रम को C3P लेंस से परखा जाता है:
क्या हम जिज्ञासा बढ़ा रहे हैं?
क्या रचनात्मकता को बढ़ावा दे रहे हैं?
क्या हम नैतिकता और संवेदना मजबूत कर रहे हैं?
क्या हम छात्रों को उद्देश्यपूर्ण बना रहे हैं?
उनका मानना है कि—जब संस्थान उद्देश्य से चलते हैं, तो उत्कृष्टता अपने आप आती है।
3. SNU को इंडस्ट्री 5.0 के लिए टैलेंट हब में बदलने की पहल
डॉ. बोस:
“इंडस्ट्री 5.0 में तकनीक इंसान की जगह नहीं लेती, बल्कि मानव बुद्धिमत्ता को और मजबूत बनाती है। इसलिए SNU को लाइफ-रेडी स्किल्स और C3P क्षमताओं पर दोबारा ढाला जा रहा है।”
मुख्य पहलें:
- लाइफ-रेडी करिकुलम
समस्या समाधान, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, मूल्यों और भविष्य की स्किल्स का समावेश।
- स्कूल ऑफ लाइफलॉन्ग लर्निंग (लॉन्च: जनवरी 2026)
एआई टूल्स, डिजिटल स्किल्स, कम्युनिकेशन, लीडरशिप और करियर रेडीनेस में माइक्रो-क्रेडेंशियल्स।
- C3P टैलेंट डेवलपमेंट मॉडल
जिज्ञासा आधारित खोज, क्रिएटिविटी स्टूडियो, सामुदायिक कार्य और उद्देश्य-आधारित करियर प्लानिंग।
- इंडस्ट्री इमर्शन और को-ऑप मॉडल
छात्र 6–12 महीने उद्योग में बिताते हैं और वास्तविक कौशल अर्जित करते हैं।
- डीप टेक लैब्स और हाई-वैल्यू सुविधाएं
AR/VR, VLSI, iOS, Salesforce, Green DevOps जैसी अत्याधुनिक लैब्स — कौशल विकास के लिए, न कि केवल डिग्री के लिए।
“अब SNU डिग्री फैक्ट्री नहीं है, बल्कि लाइफ-रेडी और फ्यूचर-रेडी टैलेंट फैक्ट्री बन रहा है।”
4. टेक्नो इंडिया जैसे बड़े शैक्षिक समूह को एक दिशा में लाना
डॉ. बोस:
“चुनौती आकार नहीं है, चुनौती उद्देश्य को एक दिशा में लेकर चलना है। पूरे समूह में लाइफ-रेडी लर्निंग फिलॉसफी को C3P फ्रेमवर्क के साथ लागू किया गया है।”
रणनीति में शामिल है:
एकीकृत विज़न: सभी संस्थानों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, संवेदना और उद्देश्य
विकेंद्रीकृत नवाचार: स्वायत्तता के साथ साझा मूल्य
डेटा-आधारित नेतृत्व: डैशबोर्ड, ऑडिट, KPI और शैक्षणिक गवर्नेंस
सांस्कृतिक समरूपता: फैकल्टी प्रशिक्षण, नेतृत्व मार्गदर्शन और मूल्य शिक्षा
“टेक्नो इंडिया के किसी भी संस्थान में छात्र प्रवेश करे, उसे एक ही मूल भावना मिले — लाइफ-रेडी + C3P एजुकेशन।”
5. 2035 की विरासत: आज के छात्रों को क्या बदलना होगा
डॉ. बोस:
“मेरा लक्ष्य है—लाइफ-रेडी भारत का निर्माण। ऐसे छात्र जो आत्मविश्वासी हों, संवेदनशील हों और वैश्विक स्तर पर सक्षम हों। एक ऐसी पीढ़ी जो C3P को जीती हो।”
वे दो जरूरी मानसिक परिवर्तनों पर जोर देते हैं:
- ‘मार्क्स-रेडी’ से ‘लाइफ-रेडी’ बनना
मार्क्स करियर शुरू करते हैं, जीवन कौशल उसे आगे बढ़ाते हैं।
- ‘जॉब-सीकिंग’ से ‘प्रॉब्लम-सॉल्विंग’ की ओर बढ़ना
नौकरी चाहने वाले प्रतिस्पर्धा करते हैं, समस्या सुलझाने वाले नेतृत्व करते हैं।
उनका स्पष्ट संदेश— “अगर भारत के युवा लाइफ-रेडी लर्निंग और C3P मूल्यों को अपनाते हैं, तो 2035 तक भारत केवल वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में हिस्सा नहीं लेगा—
भारत उसे दिशा देगा।”




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