
देशभर में NEET परीक्षा को लेकर मचे घमासान के बीच विदेश से MBBS की डिग्री लेकर भारत आने वाले छात्रों ने दिल्ली के ओखला स्थित नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के उस फैसले का विरोध कर रहे थे जिसमें उनकी इंटर्नशिप की अवधि को बढ़ाने की बात कही गयी है।
बता दें कि हाल ही में विदेश में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों को लेकर नेशनल मेडिकल काउंसिल ने नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों के सर्टिफिकेट को मान्यता नहीं दी जाएगी, साथ ही विदेश से पढ़ाई करने वाले कैंडिडेट्स को भारत में डॉक्टर बनने के लिए पहले Foreign Medical Graduate (FMG) परीक्षा और फिर 2 से 3 साल की इंटर्नशिप को क्लियर करना होगा। इसे लेकर छात्रों में भारी नाराजगी बताई जा रही है।
कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के इस फैसले का सीधा असर विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करे रहे छात्रों पर या पढ़ाई करने का सोच रहे कैंडिडेट्स पर पड़ेगा। इससे उनका समय व्यर्थ होगा। यही वजह है कि वे इसका विरोध कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर कोई स्टूडेंट नीट एग्जाम में मेरिट में नहीं आता है और वह विदेश पढा़ई करने चला जाता है तो वह वहां 5 साल पढ़ाई करने के बाद भारत लौटता है। यहाँ आने के बाद वह FMG एग्जाम की तैयारी में थोड़ा वक्त देता है। एग्जाम निकालने के बाद वह 2 से 3 साल की इंटर्नशिप करेगा, फिर कहीं जाकर डॉक्टर बनेगा। इसमें कैंडिडेट को करीबन 10 साल लग जाएंगे। यह समय व्यर्थ करने वाली बात है।
छात्र यहाँ तक कह रहे हैं कि यह फैसला शायद इसलिए लिया गया है ताकि अगर नीट क्लियर ना हो पाए तो विदेश में पढ़ाई करने के बजाय कैंडिडेट भारत के प्राइवेट कॉलेजों में महंगी फीस देकर पढ़ाई करें क्योंकि भारत के मुकाबले कुछ देशों में मेडिकल की पढ़ाई थोड़ी सस्ती है।
शिक्षा सलाहकारों का भी कहना है कि अगर कोई छात्र किसी यूनिवर्सिटी में इतने साल मेडिकल की पढा़ई करके आ रहा है तो उसे एग्जाम की तैयारी करने के लिए सालों तक पढ़ाई करने की क्या जरूरत है ! यह उन छात्रों के लिए स्पष्ट रूप से सज़ा है जिन्होंने ईमानदारी से और ऑफ़लाइन तरीके से अपनी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी की है। एनएमसी को उन लोगों की पहचान करनी चाहिए जिनके पास व्यावहारिक प्रशिक्षण के नकली प्रमाण पत्र हैं, कम से कम उन लोगों को अनुमति दें जो ऑफ़लाइन कक्षाओं में गए हैं। ईमानदार और योग्य छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में उचित विचार किए बिना अधिसूचना जारी करना गलत है।
बता दें कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि ऐसा देखा गया है कि विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र गलत तरीके से अपने संस्थानों से प्रतिपूरक प्रमाण पत्र हासिल कर रहे हैं। चिकित्सा पेशे में काम करने वाले लोग कुशल पेशेवर होने चाहिए। सही तरह से प्रशिक्षण प्राप्त न करने वाले मेडिकल स्नातक छात्रों के हाथ में लोगों की ज़िन्दगी नहीं दी जा सकती।




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