
भारत में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी है। जल्द ही देश में नौकरियों की बाढ़ आने वाली है। वर्कफोर्स सॉल्यूशंस कंपनी मैनपावरग्रुप ने ग्लोबल लेवल पर किए एक सर्वे के बाद खुलासा किया है कि भारत में चीन और अमेरिका के मुकाबले कहीं ज्यादा नौकरियां पैदा होने वाली हैं। इतना ही नहीं आने वाले समय में भर्तियां करने के मामले में भारत दुनिया में 6वें पायदान पर पहुंच सकता है। सर्वे में कहा गया है कि आने वाली तिमाही रोजगार के मोर्चे पर काफी बेहतर साबित होने वाली है।
मैनपावरग्रुप की वैश्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जुलाई-सितंबर, 2024 तिमाही में नौकरियां देने के परिदृश्य के मामले में दुनिया में छठे स्थान पर है। यह वैश्विक औसत से आठ अंक ऊपर है। देश की 30 फीसदी कंपनियां अगले तीन महीने में अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ा सकती हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो अभी देश में 16.6 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं और इसका 30 फीसदी 4.98 लाख होगा। इसका मतलब हुआ कि अगर ये सभी कंपनियां अभी एक्टिव हैं तो करीब 5 लाख कंपनियां आने वाले समय में भर्ती कर सकती हैं। भारत के शुद्ध रोजगार परिदृश्य (NEO) की कैलकुलेशन, छंटनी की योजना बनाने वाले एम्प्लॉयर्स की संख्या को नियुक्ति की योजना बनाने वाले एम्प्लॉयर्स से घटाकर की गई है।
मैनपावरग्रुप के सर्वे के मुताबिक, कोस्टारिका भर्तियों के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है। यहां 35 फीसदी कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ा सकती हैं। स्विट्जरलैंड 34 फीसदी के साथ दूसरे, ग्वाटेमाला 32 फीसदी के साथ तीसरे, मेक्सिको 32 फीसदी के साथ चौथे और दक्षिण अफ्रीका 31 फीसदी के साथ पांचवें स्थान पर है। यह सर्वे 42 देशों की 3,150 कंपनियों से भर्तियों की मिली जानकारी पर आधारित है।
दूसरी ओर, अर्जेंटीना और रोमानिया में सबसे कम तीन प्रतिशत NEO रिकॉर्ड किया गया। मैनपावरग्रुप एम्प्लॉयमेंट सिनैरियो सर्वे के नए वर्जन में भारत में 3,150 एम्प्लॉयर्स से उनकी तीसरी तिमाही की नियुक्ति संबंधी मंशा के बारे में पूछा गया। मैनपावरग्रुप के भारत-पश्चिम एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप गुलाटी ने कहा, वैश्विक मंदी का असर भारत के आईटी क्षेत्र पर काफी समय से पड़ रहा है। हालांकि, रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। आवासीय क्षेत्र में 1.1 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हुआ है।
सर्वे के मुताबिक, उत्तर भारत में नियुक्ति की संभावना सबसे अधिक 36 फीसदी है। पश्चिम भारत में 31 फीसदी, दक्षिण में 30 फीसदी और पूर्व में 21 फीसदी कंपनियों ने भर्ती करने की इच्छा जताई है। आम धारणा के विपरीत करीब 68 फीसदी कंपनियां अगले दो साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग को अपनाने के कारण कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इसका नेतृत्व संचार सेवा क्षेत्र, वित्तीय, रियल एस्टेट, उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र करेंगे।




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