
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ ((JNUSU) ने विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रवेश परीक्षा को पहले की तरह लागू करने की मांग की है। उसका कहना है कि JNU में स्नातक, परास्नातक और पीएचडी में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षाएं पूर्व की भांति विश्वविद्यालय खुद ले। अपनी मांग को लेकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने कुलपति शांतिश्री पंडित से भी मुलाकात की।
जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष धनंजय कुमार ने कहा कि छात्र NTA की ओर से आयोजित NET की प्रवेश परीक्षा नही देना चाहते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण ये है कि NET का सिलेब्स अलग होता है और JNU शोध का सिलेब्स अलग होता है। उन्होंने कहा कि NTA द्वारा जो एग्जाम कराया जा रहा है, उससे पूरे देश के छात्र प्रताड़ित हैं। NET के जरिए PhD के छात्र लिए जाएं ये जिद क्यों है? जिस तरह एग्जाम का तरीका JNUEE ( जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एंट्रेंस एग्जाम) का था, वैसे ही दोबारा होना चाहिए। इससे छात्रों को कई फायदे होते थे।
गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एंट्रेंस एग्जाम (JNUEE), जिसके माध्यम से पहले दाखिले होते थे, NTA द्वारा आयोजित एग्जाम से बहुत सस्ता होता था। इसमें फीस केवल 200- 250 रुपए होती थी, जो NTA अब 1000 या 1600 तक वसूल रहा है। साथ ही सेंटर कहीं दूर नहीं पड़ते थे। तीसरा छात्र सिर्फ एक सब्जेक्ट नही बल्कि कई सब्जेक्ट में एग्जाम दे सकते थे। NTA के एग्जाम में एक ही सब्जेक्ट चुनना होता है। हमारी मांग पूरी नहीं होती तो राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करेंगे.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने चेतावनी भी दी है कि अगर JNU में पूर्व में निर्धारित व्यवस्था के तहत एंट्रेंस एग्जाम कराने की मांग पूरी नहीं होती है तो वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करेगा। छात्रसंघ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यूजीसी नेट परीक्षा रद्द होने से देश के लाखों छात्रों को पीएचडी में प्रवेश के लिए देरी हो रही है।




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