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TISS ने 100 से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी वापस ली, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट धन जारी करने पर सहमत

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी टीआईएसएस (TISS) ने टाटा एजुकेशन ट्रस्ट यानी टीईटी (TET ) द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रमों के तहत नियुक्त शिक्षण और गैर-शिक्षण सहित 100 से अधिक संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त करने का अपना फैसला वापस ले लिया है, जिनकी सेवा उसने धन जारी न होने का हवाला देते हुए अचानक ख़त्म कर दी थी। बर्खास्तगी वापस लेने का कदम ट्रस्ट द्वारा TISS को संसाधन उपलब्ध कराए जाने के आश्वासन के बाद उठाया गया। टीआईएसएस के रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित संस्थान द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “टीईटी ने टीईटी परियोजना/कार्यक्रम संकाय और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन के लिए धन जारी करने को लेकर प्रतिबद्धता जताई है।”

TISS प्रशासन ने पुष्टि की है कि टाटा एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा कुल 4.79 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर की गई है। यह सूचित करते हुए कि सभी संबंधित टीईटी कार्यक्रम संकाय और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को संबोधित 28 जून का पत्र तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है, इसमें कहा गया है, “उनसे अपना काम जारी रखने का अनुरोध किया जाता है, और संस्थान को टीईटी से अनुदान समर्थन मिलते ही शीघ्रातिशीघ्र वेतन जारी कर दिया जाएगा।”  

TISS प्रशासन के मुताबिक, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा फंड जारी करने के आश्वासन के बाद मामला फिलहाल सुलझ गया है। प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा, “संस्थान अब टीईटी परियोजना आधारित संविदा कर्मचारियों को वैसे ही जारी रखने में सक्षम है। इस बीच, संस्थान भविष्य में कर्मचारियों की आवश्यकताओं का पता लगाने और उन्हें यूजीसी द्वारा अनुमोदित अन्य नियुक्तियों के अनुसार पद के लिए विज्ञापन की नियमित प्रक्रिया के साथ नियुक्त करने पर काम करेगा।”

बता दें कि शुक्रवार को, TISS ने अपने चार परिसरों में लगभग 55 शिक्षकों और लगभग 60 गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्यों को बिना किसी नोटिस के बर्खास्त कर दिया था। 28 जून को जारी पत्र के माध्यम से कर्मचारियों को सूचित किया गया था कि संस्थान कई प्रयासों के बाद भी टाटा एजुकेशन ट्रस्ट से उनके वेतन के लिए अनुदान जारी करवाने में असमर्थ रहा।

इन सभी कर्मचारियों को टाटा एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के तहत पदों पर नियुक्त किया गया था। जबकि, TISS परिसरों में शेष शिक्षक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) पेरोल पर स्थायी संकाय सदस्य हैं। प्रशासन के मुताबिक, उसने पिछले छह महीनों में कई बार टाटा एजुकेशन ट्रस्ट से संपर्क किया था। प्रशासन को अनुदान जारी रखने के लिए एक प्रस्ताव प्रस्तुत करना आवश्यक था, जो उन्होंने कहा था कि उन्होंने भेज दिया है। लेकिन अनुदान अवधि को आगे बढ़ाने के संबंध में निर्णय पर कोई प्रतिक्रिया या कोई अद्यतन जानकारी नहीं थी। पत्र में यह भी कहा गया था कि “टाटा एजुकेशन ट्रस्ट से अनुमोदन/अनुदान प्राप्त न होने की स्थिति में” उनकी सेवाएं 30 जून से समाप्त हो जाएंगी।

 

Asmita Sarkar

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