
जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) के जवाहरलाल नेहरू अध्ययन केंद्र की तीन महिला शोधार्थियों ने अपने पीएचडी सुपरवाइजर पर “मानसिक और यौन उत्पीड़न” का आरोप लगाया है। इनमें से एक छात्रा ने लिंग आधारित भेदभाव, प्रोफेसर द्वारा यौन टिप्पणियां और उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी को कारण बताते हुए 26 जून को अपना कोर्स भी छोड़ दिया है।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि उसकी आंतरिक शिकायत समिति (ICC) इस मामले को देख रही है, जबकि प्रोफेसर ने उक्त आरोपों को “निराधार” बताया है। उन्होंने कहा, “ये केवल मेरी प्रतिष्ठा को बर्बाद करने का प्रयास है।” कोर्स छोड़ने वाली छात्रा को लेकर उन्होंने कहा, “अगर कोई छात्रा कोर्स छोड़ने का फैसला करती है, तो यह उस पर निर्भर करता है।”
दरअसल, पीएचडी छात्राओं ने विश्वविद्यालय को दो तरह की शिकायतें दी थीं। 9 मई और 13 मई को दी गई शिकायतों में आरोपों का विवरण दिया गया था और सुपरवाइजर को बदलने का अनुरोध किया गया था। वहीँ 7 जुलाई और 8 जुलाई को दी गई शिकायतों के दूसरे चरण में उन्होंने उसी सुपरवाइजर के साथ काम करते हुए “मानसिक तनाव” का सामना करने का उल्लेख किया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई दी है कि “विश्वविद्यालय में शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर बदलाव” के कारण इस मामले की जांच जल्दी शुरू नहीं की जा सकी। हालांकि अब उसका कहना है कि “आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में बहुत जल्द इसपर कार्यवाही होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शिकायतकर्ताओं को समिति के समक्ष अपना मामला पेश करने का उचित मौका मिले। उनके पर्यवेक्षक को बदलने के अनुरोध पर शीर्ष स्तर पर विचार किया जा रहा है और उन्हें बहुत जल्द ही इस घटनाक्रम के बारे में सूचित किया जाएगा।”
अपनी शिकायत में एक छात्रा ने कहा है कि उनके पर्यवेक्षक ने फोन कॉल पर यौन टिप्पणियाँ कीं। एक अन्य छात्रा ने कहा कि हाशिए पर पड़े समुदायों और लिंग के बारे में उनके शोध प्रस्तावों का मजाक उड़ाया गया। एक छात्रा ने कहा कि प्रोफेसर अक्सर “पाठ्यक्रम के दौरान लिव-इन रिश्तों के बारे में अप्रासंगिक टिप्पणियाँ” करते थे और अवांछित बातें किया करते थे जिनका पढ़ाए जा रहे विषय से कोई संबंध नहीं था।
छात्रा का कहना है कि “फीडबैक के अभाव और उपहास के कारण, हम वर्षों से अपने सिनॉप्सिस के साथ फंसे हुए थे। मानसिक आघात के कारण मुझे माइग्रेन होने लगा। उन्होंने आगे कहा, “प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी प्रोफेसर ने हमें जुलाई में समीक्षा बैठक के लिए बुलाया। प्रशासन ने हमें बताया कि हमारे पर्यवेक्षक को बदलने की प्रक्रिया लंबी है।”




Add comment