
इंटिएक्सलैंट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने मांग की है कि सरकार इस बार ऐसे बजट पेश करे जिससे कि रोजगार उत्पन्न हो सके। इसके लिए वैश्विक ताकतों के साथ सहयोग करने की जरूरत है।
इंटिएक्सलैंट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सचिव विनिता ने कहा कि इस बार का बजट रोजगारपरक बनाने की जरूरत है। सरकार को विनिर्माण क्षेत्र में बड़ी बढ़त हासिल करने के लिए इसे वैश्विक ताकतों के साथ सहयोग करने की जरूरत होगी। इस प्रक्रिया में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
विनिता ने कहा कि सरकार ने अंतरिम बजट में शिक्षा और उद्योग में सहयोग की बात कही थी। निश्चित तौर पर सरकार को शोध और विकास यानी आरएडंडी पर खर्च करना होगा। सरकार ने अंतरिम बजट में तकनीकी खंड में शोध को बढ़ाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के बीच की घोषणा की थी और तकनीक में नवाचार के लिए एक योजना का भी प्रस्ताव दिया था। भारत जीडीपी का मात्र 1 फीसदी ही शोध व विकास पर खर्च करता है जबकि अमेरिका, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपने बजट का बड़ा हिस्सा। ऐसे में इस ओर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
इंटिएक्सलैंट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सचिव ने कहा कि सरकार को वित्तीय बजट को बढ़ावा देने और पूंजी बाजारों का दायरा व्यापक बनाने पर ध्यान केंद्रीत करने की जरूरत है। गौरतलब है कि इंटिएक्सलैंट चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री देश की अग्रणी औद्योगिक संस्था है जिसमें देशभर के उद्योगपति, पॉलिसीमेकर, रेगुलेटर एवं एक्सपर्ट सदस्य हैं।




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