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‘अस्मिता’ परियोजना की शुरुआत, अगले 5 सालों में भारतीय भाषाओं में 22,000 नई किताबें तैयार करने का लक्ष्य 

शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने अगले पांच वर्षों में भारतीय भाषाओं में 22,000 किताबें विकसित करने के लिए एक परियोजना शुरू की है। अस्मिता (अनुवाद और अकादमिक लेखन के माध्यम से भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री को बढ़ाना) नामक परियोजना, उच्च शिक्षा सचिव, संजय मूर्ति द्वारा लॉन्च की गई। यह शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी और मंत्रालय के तहत एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति, भारतीय भाषा समिति का एक सहयोगात्मक प्रयास है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा, “तीन ऐतिहासिक पहलों – अस्मिता, बहुभाषा शब्दकोष और रियल-टाइम ट्रांसलेशन आर्किटेक्चर का शुभारंभ, भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान करने, शिक्षार्थियों को उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में सशक्त बनाने और भारत की भाषा परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने को गति देगा।” 

यूजीसी के अध्यक्ष जगदेश कुमार के अनुसार, परियोजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा के भीतर विभिन्न विषयों में भारतीय भाषाओं में अनुवाद और मूल पुस्तक लेखन के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। उन्होंने कहा, “लक्ष्य पांच साल के भीतर 22 भाषाओं में 1,000 किताबें तैयार करने का है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय भाषा में 22,000 किताबें तैयार होंगी।”

आगे कहा, “यूजीसी ने प्रत्येक निर्दिष्ट भाषा में पुस्तक-लेखन प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी बनाई है। एसओपी में नोडल अधिकारियों, लेखकों की पहचान, शीर्षक, विषय और कार्यक्रम का आवंटन, लेखन और संपादन, समीक्षा और साहित्यिक चोरी की जांच, अंतिम रूप देना, डिजाइनिंग, प्रूफ-रीडिंग और ई-प्रकाशन आदि शामिल है।”

मंत्रालय ने “बहुभाषा शब्दकोश” भी लॉन्च किया, जो सभी भारतीय भाषाओं के सभी शब्दों और उनके अर्थों के लिए एकल-बिंदु संदर्भ है।”

यूजीसी ने एक बयान में कहा, “यह पहल भारतीय भाषा समिति के सहयोग से केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) द्वारा विकसित की जाएगी। यह शब्दकोश आईटी, उद्योग, अनुसंधान, शिक्षा जैसे विभिन्न नए-युग के डोमेन के लिए भारतीय शब्दों, वाक्यांशों और वाक्यों का उपयोग करने में मदद करेगा।”

 

Asmita Sarkar

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