
सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी परीक्षा को स्थगित करने से इनकार कर दिया है। छात्रों ने शीर्ष न्यायालय में इस संबंध में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम अब नीट पीजी परीक्षा को स्थगित नहीं कर सकते, इससे 2 लाख छात्रों और 4 लाख अभिभावकों को नुकसान होगा।
CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, “अब पीजी परीक्षा को पुनर्निर्धारित करना संभव नहीं है, वे सभी हम सभी के बच्चे हैं। हम इसे पुनर्निर्धारित नहीं करेंगे। इससे 2 लाख छात्र और 4 लाख अभिभावक पीड़ित होंगे। 5 याचिकाकर्ताओं के इशारे पर 2 लाख छात्रों के करियर को खतरे में नहीं डाला जा सकता।”
याचिका में कहा गया था कि दो लाख से अधिक छात्र इस परीक्षा में शामिल होने वाले हैं। यह परीक्षा 185 परीक्षा शहरों में दो पालियों में आयोजित की जानी है, इस वजह से ट्रेन टिकट उपलब्ध नहीं होंगे और हवाई किराए में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे बड़ी संख्या में छात्रों के लिए अपने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील संजय हेगड़े ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि परीक्षा केंद्रों की संख्या 1,200 से घटाकर 500 कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 50,000 फोन कॉल आए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि “2 परीक्षाएं, 2 पेपर सामान्यीकरण को ‘स्वाभाविक रूप से समस्याग्रस्त’ बना देंगे।
बता दें कि इस वर्ष नीट पीजी परीक्षा की तिथि को तीन बार संशोधित किया गया है। नीट यूजी पेपर लीक विवाद को देखते हुए और कदाचार से बचने के लिए बोर्ड ने निर्धारित तिथि से एक दिन पहले 23 जून को परीक्षा स्थगित कर दी थी। अब NBEMS ने 11 अगस्त को 2 शिफ्ट में नीट पीजी की परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की है। एक से ज्यादा शिफ्ट में परीक्षा होने पर मूल्यांकन के लिए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला अपनाया जाता है। इसे लेकर परीक्षार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।




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