
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे में शाकाहारी बनाम मांसाहारी भोजन को लेकर एक बार फिर से विवाद पैदा हो गया है। दरअसल आईआईटी बॉम्बे की हाइजीन कमिटी यानी स्वच्छता समिति ने एक नोटिस जारी कर “शुद्ध शाकाहारी” कैंटीन में मांसाहारी भोजन के प्रवेश पर रोक लगा दी है।
आईआईटी बॉम्बे के अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्किल (एपीपीएससी) से जुड़े छात्रों ने इस फैसले पर नाराज़गी जताई है। एपीपीएससी ने सोशल मीडिया पर हाइजीन कमिटी के उस नोटिस को साझा किया है, जिसमें कहा गया है: “अमूल कैंटीन एक शुद्ध शाकाहारी भोजनालय है। कैंटीन के भोजन क्षेत्र में भी मांसाहारी सामान लाने की सख्त मनाही है।”
एपीपीएससी ने इस निर्णय की निंदा करते हुए इसे “शाकाहारी शुद्धतावाद” का उदाहरण बताया। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उसने इस विडंबना की ओर इशारा करते हुए कहा, “उक्त कैंटीन में ठीक से बंद भोजन क्षेत्र भी नहीं है, फिर भी वे “शुद्ध शाकाहारी” लोगों के लिए अधिक से अधिक बाड़े बनाने पर उतारू हैं।”
गौरतलब है कि पिछले साल भी एक ऐसा ही विवाद खड़ा हुआ था, जब IIT बॉम्बे ने विशेष रूप से शाकाहारियों के लिए एक अलग भोजन क्षेत्र शुरू किया था। शाकाहारी सेक्शन में मांसाहारी भोजन के साथ बैठकर विरोध करने वाले एक छात्र पर 10,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाने के बाद संस्थान को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
दरअसल, आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल 12, 13 और 14 की संयुक्त मेस में 6 टेबल हैं जहां छात्रों के लिए मेस काउंसिल द्वारा केवल शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता था। तब अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्कल से जुड़े छात्रों ने छह शाकाहारी टेबलों पर कब्जा कर लिया था और मौन विरोध शुरू कर दिया था। छात्रों की मांग थी कि वेज टेबल रखने से मुस्लिम, दलित और आदिवासी छात्र अलग हो जाते हैं।
बहरहाल, हाइजीन कमिटी यानी स्वच्छता समिति के ताजा निर्णय की भी कड़ी आलोचना हो रही है। IIT बॉम्बे का अनुसरण करते हुए IIT हैदराबाद ने भी इसके तुरंत बाद शाकाहारियों के लिए एक अलग भोजन क्षेत्र शुरू किया है। छात्रों के अनुसार, ये अलग-अलग स्थान लंबे समय से कुछ परिसरों में एक अलिखित नियम रहे हैं, कुछ संस्थानों ने तो शाकाहारियों के लिए अलग से मेस की सुविधा तक प्रदान की है।




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