
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू (JNU) में छात्र संघ जेएनयूएसयू (JNUSU) की विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ 17 दिनों से चली आ रही भूख हड़ताल (Hunger Strike) समाप्त हो गयी है। संघ ने जेएनयू प्रशासन द्वारा उनकी कई प्रमुख मांगों पर सहमति जताने और अन्य पर मौखिक आश्वासन दिए जाने के बाद विरोध-प्रदर्शन ख़त्म करने का फैसला किया।
जेएनयूएसयू ने अपने बयान में कहा है कि ‘‘भूख हड़ताल करने वालों के बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण, छात्र संघ ने भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया है। हालांकि, हमारा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। विरोध का तरीका बदल गया है, लेकिन हमारी मांगों के लिए लड़ाई नए सिरे से दृढ़ संकल्प के साथ जारी है।’’
संघ का दावा है कि जेएनयू प्रशासन ने अतिरिक्त धनराशि मिलने के बाद मेरिट-कम-मीन्स (एमसीएम) छात्रवृत्ति बढ़ाने, स्कूल ऑफ एजुकेशन (एसओई) और प्रबंधन के छात्रों को भी इन छात्रवृत्तियों के दायरे में लाने की प्रतिबद्धता जताई है।
प्रशासन ने इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को एक पत्र भी भेजा है, जिसमें वित्तीय सहायता में वृद्धि का अनुरोध किया गया है। बयान में कहा गया कि इसके अलावा, उन्होंने 15 दिनों के भीतर विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों का श्रेणीवार आंकड़ा जारी करने और सितंबर की शुरुआत में अनुसूचित जाति और लैंगिक संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने का वादा किया है।
जेएनयू प्रवेश परीक्षा (जेएनयूईई) को बहाल करना छात्र संघ के मांग पत्र में एक प्रमुख एजेंडा है। संघ ने कहा कि रेक्टर-प्रथम ने मौखिक रूप से आश्वासन दिया है कि अगले शैक्षणिक सत्र से जेएनयूईई के माध्यम से प्रवेश आयोजित किए जाएंगे।
संघ ने दावा किया कि विश्वविद्यालय ने आगामी अकादमिक परिषद (एसी) की बैठक में अनुमोदन के लिए नफे समिति की रिपोर्ट पेश करने पर भी सहमति व्यक्त की है, जिसमें प्रवेश में मौखिक परीक्षा (वाइवा) अंकों की हिस्सेदारी को घटाकर 10-15 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है।
गौरतलब है कि छात्र संगठन की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 11 अगस्त को शुरू हुई थी। उस समय इसमें 16 विद्यार्थी शामिल थे, लेकिन कई विद्यार्थियों का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद वे पीछे हट गए और अंत में जेएनयूएसयू अध्यक्ष धनंजय और काउंसलर नीतीश कुमार ही रह गए थे।




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