
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अंबेडकर ओवरसीज विद्यानिधि (एओवीएन) योजना के तहत एक उम्मीदवार को वित्तीय सहायता के भुगतान का निर्देश देने वाले पिछले आदेश के खिलाफ राज्य द्वारा दायर अपील पर विचार करने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति जे अनिल कुमार की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतें पर्याप्त कारण के बिना देरी को माफ नहीं कर सकती हैं, भले ही अपील राज्य द्वारा दायर की गई हो या किसी व्यक्ति द्वारा।
यह अपील समाज कल्याण विभाग और राज्य के अन्य अधिकारियों द्वारा गंटा वेंकट नरहरि द्वारा एक रिट याचिका के बाद दायर की गई थी। नरहरि ने एओवीएन योजना के तहत अपने बेटे के लिए छात्रवृत्ति की अस्वीकृति को चुनौती दी थी, जिसके तहत विदेशी विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) अध्ययन करने वाले अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था है।
अधिकारियों ने इस आधार पर छात्रवृत्ति से इनकार कर दिया था कि परिवार की आय 2 लाख रुपये की निर्धारित सीमा से अधिक थी।
मंगलवार की सुनवाई के दौरान, पीठ ने अपील दायर करने में 161 दिनों की देरी को देखते हुए राज्य की अपील को खारिज कर दिया और फैसला सुनाया कि देरी के लिए माफ़ी के आवेदन में कोई पर्याप्त कारण नहीं दिखाया गया है।
न्यायालय ने जोर देकर कहा कि देरी को केवल इसलिए माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि अपीलकर्ता राज्य है।




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