
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हालिया हिंसा के बढ़ते मामलों के बीच इंफाल के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने राजभवन की ओर रैली निकाली। उन्होंने हाल की हिंसा के खिलाफ पुलिस महानिदेशक और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाने और नैतिक आधार पर 50 विधायकों के इस्तीफे की भी मांग की। इस दौरान, सड़कों पर निकलकर छात्रों ने बैनर और पोस्टर लेकर सड़क पर धरना दिया और नारेबाजी की।
मैतेई समुदाय के ये छात्र मणिपुर में अचानक बढ़ी हिंसक घटनाओं को लेकर 8 सितंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें स्थानीय लोग भी शामिल हैं। रविवार को किशमपट के टिडिम रोड पर 3 किलोमीटर तक मार्च के बाद प्रदर्शनकारी राजभवन और CM हाउस तक पहुंच गए। ये गवर्नर और CM को ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
सोमवार को सुरक्षाबलों ने ज्ञापन सौंपने की मांग पूरी कर दी, इसके बाद भी स्टूडेंट्स सड़क पर प्रदर्शन करते रहे। स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक वे यहां डटे रहेंगे। इस दौरान उनकी सुरक्षाबलों के साथ झड़प भी हुई।
स्टूडेंट्स 1 और 3 सितंबर को मैतेई इलाकों में हुए ड्रोन हमलों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सेंट्रल फोर्सेस पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए उनसे राज्य छोड़कर जाने की मांग की। साथ ही राज्य के 60 में से 50 मैतेई विधायकों से अपना रुख स्पष्ट करने या इस्तीफा देने को कहा।
इन स्टूडेंट्स ने यह भी डिमांड की है कि राज्य में यूनिफाइड कमांड की कमान मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को दी जाए। यानी, सेंट्रल और स्टेट फोर्स की कमान केंद्र की बजाय मुख्यमंत्री के पास हो। ये लोग DGP और सिक्योरिटी एडवाइजर को हटाने की भी मांग कर रहे हैं।
घटनास्थल पुलिस मुख्यालय, राज्य सचिवालय और भाजपा कार्यालय के निकट है। प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा हाल में किए गए ड्रोन हमलों की निंदा करते हुए नारे लगाए और घटना में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने में अधिकारियों की ‘‘अक्षमता’’ की निंदा की। उन्होंने ड्रोन हमलों को रोकने में कथित रूप से विफल रहने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक को पद से हटाने की मांग करते हुए नारे लगाए।
धनमंजुरी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के महासचिव ने कहा, “यह रैली संबंधित अधिकारियों को यह जानकारी देने के लिए है कि कैद में रहने और इंफाल घाटी में रहने में कोई अंतर नहीं है। फिलहाल यहां कोई सेफ्टी जोन नहीं है। कुकी ने दावा किया है कि उनके पास ऐसी मिसाइलें हैं जो 20 किलोमीटर तक निशाना साध सकती हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार, राज्यपाल, असम राइफल्स, केंद्रीय बलों और सभी कदाचारों की कार्रवाई को रेगूलेट करने के लिए हमारे मुख्यमंत्री को यूनिफाइड कमान दें।”




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