
दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर स्थित राउ कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में 3 छात्रों के डूबने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने जेल भेजे गए बेसमेंट के चारों सह-मालिकों को अंतरिम जमानत दे दी है। जमानत की शर्त यह रखी गयी कि वे रेड क्रास के पास पांच करोड़ रूपये राशि जमा कराएं। दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि यह राहत सह-मालिकों द्वारा रेड क्रॉस के पास 5 करोड़ रुपये जमा करने पर निर्भर है। आरोपियों को 30 जनवरी, 2025 तक जमानत देते हुए कोर्ट ने मालिकों का आचरण अक्षम्य और लालची बताया।
मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में उपराज्यपाल से हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के अधीन एक समिति गठित करने का अनुरोध किया है।
कोर्ट ने कहा कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बिना अनुमति के कोई भी कोचिंग सेंटर न चल सके। न्यायमूर्ति शर्मा ने प्राधिकारियों को भी राजधानी में कोचिंग सेंटरों के लिए भी स्थान निर्धारित करने को कहा है।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने कहा कि अंतरिम राहत याचिकाकर्ताओं- परविंदर सिंह, तजिंदर सिंह, हरविंदर सिंह और सरबजीत सिंह- द्वारा रेड क्रॉस सोसाइटी के पास 5 करोड़ रुपए जमा कराने की शर्त पर है जिसका उपयोग उपराज्यपाल द्वारा कोचिंग सेंटरों के संचालन को सुचारू बनाने के लिए किया जाएगा।
हालांकि, मृतक छात्रों में से एक के परिजनों की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी थी कि जांच पूरी होने तक याचिकाकर्ताओं को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोचिंग सेंटर भवन उपनियमों का उल्लंघन करके चलाया जा रहा था और याचिकाकर्ताओं को यह जानकारी थी कि बारिश के बाद सड़क पर बाढ़ आती है और बाढ़ का पानी बेसमेंट में चला जाएगा।
गौरतलब है कि 27 जुलाई की शाम राउ कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बनी लाइब्रेरी में भारी बारिश के बाद पानी भर गया था। इस वजह से उसमें करीब 30 छात्र फंस गए थे, जिनमें से अधिकतर को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन 3 को नहीं बचाया जा सका। मृतकों की पहचान नेविन डाल्विन (केरल), तान्या सोनी (तेलंगाना) और श्रेया यादव (उत्तर प्रदेश) के तौर पर हुई थी। सभी IAS की तैयारी कर रहे थे। इसके विरोध में कई दिन तक छात्रों ने प्रदर्शन हुआ था।




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