
उत्तर प्रदेश के 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की नई तारीख आ गई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। पहले 23 सितंबर को सुनवाई होनी थी लेकिन जज के न होने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी थी।
गौरतलब है कि 69000 शिक्षक भर्ती मामले में पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पुरानी सभी सूची रद्द करते हुए नए सिरे से आरक्षण के नियमों के अनुसार सूची बनाने के निर्देश दिए थे। इसके तुरंत बाद लगभग चार साल से इस भर्ती में आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने इस आदेश को तुरंत लागू कराने के लिए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
इस बीच चयनित अभ्यर्थी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहां मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले में एक सुनवाई कर चुकी है। इस मामले में 9 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा कोर्ट ने सभी को अपना पक्ष रहने को कहा था। इसके बाद सभी पक्षों को लिखित सूचना देने के साथ ही 23 सितंबर को सुनवाई होनी थी किंतु नहीं हो सकी। अब दशहरे के बाद 15 अक्तूबर को इस मामले की सुनवाई होनी है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी इससे निराश हैं।
इनका नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि इससे जुड़ी एक नई रिट पर सुनवाई प्रस्तावित है। हम प्रयास करेंगे कि इसमें वरिष्ठ अधिवक्ताओं के माध्यम से अपनी रिट पर भी सुनवाई की अपील करेंगे। क्योंकि हम पहले से ही चार साल से इंतजार कर रहे हैं। यह मामला और खिंचता जा रहा है। प्रदेश सरकार जल्द से जल्द हमें नियुक्ति देकर इस मामले का पटाक्षेप करे।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 69 हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती निकाली थी। इसके एग्जाम जनवरी 2019 में हुए थे। इसके बाद कटऑफ के हिसाब से उम्मीदवारों को नौकरी मिली थी। लेकिन बाद में इसको लेकर बवाल हो गया था। शिक्षक अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि इस भर्ती में 19 हजार सीटों पर घोटाला हुआ है। उन्होंने दावा किया था कि इस भर्ती में ओबीसी को 27 फीसदी का आरक्षण मिलना चाहिए था, लेकिन उन्हें सिर्फ 3.86 फीसदी ही आरक्षण मिला। इसके अलावा एससी कैटेगरी को 21 फीसदी का आरक्षण मिलना था तो उन्हें सिर्फ 16.6 फीसदी ही आरक्षण मिला है।




Add comment