
तमिलनाडु के सरकारी लॉ कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षण संकायों की कमी पर मद्रास हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य के विधि सचिव को तलब किया है और उन्हें इस मुद्दे के समाधान के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बट्टू देवानंद ने इस सम्बन्ध में आदेश पारित करते हुए विधि सचिव को 15 अक्टूबर को अदालत के समक्ष उपस्थित होने और एसोसिएट और सहायक प्रोफेसर के रिक्त पदों को भरने के लिए की जाने वाली कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह आदेश इस मामले से संबंधित वर्ष 2018 की एक याचिका पर पारित किया गया।
न्यायाधीश ने कहा कि एसोसिएट प्रोफेसर के 20 स्वीकृत पदों में से 19 खाली पड़े हैं जबकि नौ एसोसिएट प्रोफेसर अपग्रेड किए गए पदों पर काम कर रहे हैं। जहां तक सहायक प्रोफेसर के पदों का सवाल है, तो अभी 206 में से 70 पद खाली हैं।
न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी व्यक्ति नियमित पदों पर सहायक और एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति के बिना सरकारी लॉ कॉलेजों के छात्रों को उचित कानूनी शिक्षा प्रदान किए जाने की उम्मीद नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति “भविष्य की पीढ़ी को नष्ट करने” की ओर ले जाती है, जो इस महान पेशे में प्रवेश करने में रुचि रखते हैं। “इन परिस्थितियों में, यह अदालत इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान दे रही है। यदि राज्य सरकार एसोसिएट और सहायक प्रोफेसरों के स्वीकृत पदों पर स्थायी आधार पर शिक्षण संकाय नियुक्त करने की स्थिति में नहीं है, तो उचित योग्य कर्मचारियों के बिना लॉ कॉलेजों को चलाने के बजाय राज्य के सभी सरकारी लॉ कॉलेजों को बंद करना बेहतर है,” उन्होंने कहा।




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