
ओडिशा के ब्रह्मपुर विश्वविद्यालय ने जूनियर्स की रैगिंग करने के आरोप में 17 स्नातकोत्तर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय के द्वितीय वर्ष के चार पीजी छात्रों को छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया और 13 अन्य पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इन छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने दो सप्ताह पहले कुछ जूनियर छात्रों की रैगिंग की थी। चारों छात्रों में से एक आईआरपीएम, पत्रकारिता एवं जनसंचार और एमबीए पाठ्यक्रम के थे। इन छात्रों को छात्रावास खाली करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
कुलपति गीतांजलि दास ने कहा कि आरोपी छात्रों में से चार को अपने छात्रावास के कमरे खाली करने के लिए कहा गया है, जबकि 13 अन्य पर 1000-1000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि 21 सितंबर को हुई घटना की एंटी-रैगिंग समिति द्वारा जांच किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
रैगिंग की घटना 21 सितंबर को हुई थी, जब द्वितीय वर्ष के कुछ छात्रों ने अपने जूनियर छात्रों को मानसिक रूप से परेशान किया और उन्हें रात भर जगाए रखने के लिए नाचने-गाने के लिए कहा। घटना के बाद प्रथम वर्ष के छात्रों ने छात्रावास के वार्डन से शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने यूजीसी के एंटी-रैगिंग सेल को एक ईमेल भेजा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को दी गई शिकायत में स्नातकोत्तर (प्रथम वर्ष) के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ छात्र रात करीब 11 बजे उनके छात्रावास के कमरे में आए और परिचय के नाम पर उनसे विभिन्न विवरण पूछते रहे तथा उन्हें सोने नहीं दिया। कुछ दिनों बाद यूजीसी ने विश्वविद्यालय को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने शिकायत में वरिष्ठ छात्रों का नाम नहीं बताया। यूजीसी द्वारा संबंधित शिकायत अग्रसारित किये जाने के बाद विश्वविद्यालय हरकत में आया।
कुलपति गीतांजलि दास के निर्देशानुसार पीजी काउंसिल के अध्यक्ष सुकांत कुमार के नेतृत्व में अनुशासन समिति तथा एंटी रैगिंग सेल के सदस्यों और एक सुरक्षा अधिकारी की 12 सदस्यीय टीम मामले की जांच के लिए गठित की गई। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर रैगिंग में शामिल छात्रों की पहचान की गई। पैनल ने 4 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालांकि मामले को सुलझाने में हॉस्टल वार्डन की निष्क्रियता और पहल की कमी के आरोपों की जांच पैनल द्वारा नहीं की गई।
कुलपति ने कहा, ‘‘यूजीसी ने विश्वविद्यालय से मामले की जांच करने और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। हमने पहले ही यूजीसी को कार्रवाई रिपोर्ट दे दी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने छात्रों को रैगिंग के परिणामों के बारे में भी जागरूक किया है और उन्हें परिसर में ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होने के लिए चेताया है।’’




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